दिनाकरन पर महाभियोग के लिए सभापति को सौंपी गई याचिका (लीड-1)
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "न्यायाधीश (जांच) अधिनियम-1968 के तहत न्यायमूर्ति दिनाकरन को हटाने के लिए राज्यसभा के 75 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रस्ताव का नोटिस सभापति को सोमवार को सौंप दिया गया।"
भाजपा नेता एस.एस.अहलूवालिया ने कहा कि दिनाकरन के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की मांग करने वाली इस याचिका पर भाजपा, जनता दल (युनाइटेड), शिरोमणि अकाली दल, असम गण परिषद, बीजू जनता दल, वामपंथी पार्टियों, समाजवादी पार्टी (सपा), डीएमके और तेलुगू देशम पार्टी के 75 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अब सभापति को एक तीन सदस्यीय समिति गठित करनी होगी। समिति में सर्वोच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय का एक मुख्य न्यायाधीश तथा एक न्यायविद शामिल होगा। यह समिति सदन को सौंपे गए आरोपों की जांच करेगी।
यदि यह समिति न्यायाधीश को दोषी पाती है और उन्हें हटाने की सिफारिश करती है तो यह मामला मतदान के लिए लोकसभा में भेजा जाएगा। इस प्रस्ताव को प्रत्येक सदन में दो तिहाई बहुमत से पारित होना होगा।
अहलूवालिया ने कहा कि प्रक्रिया को शुरू करने और समिति गठित करने की समय सीमा के बारे में संविधान मौन है। अहलूवालिया ने संसद भवन में संवाददाताओं से कहा, "देखते हैं सभापति महोदय क्या कार्रवाई करते हैं।"
भाजपा नेताओं ने कहा है कि दिनाकरन के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
महाभियोग याचिका पर कांग्रेस के किसी भी सांसद के हस्ताक्षर नहीं है। इस बारे में पूछने पर कांग्रेस प्रवक्ता व राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनकी पार्टी अभी इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले पाई है।
सिंघवी ने आईएएनएस को बताया, "कांग्रेस अभी इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले पाई है। लिहाजा इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।"
गौरतलब है कि महाभियोग की प्रक्रिया संबंधी याचिका के लिए राज्यसभा के 50 सदस्यों या फिर लोकसभा के 100 सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। पर्याप्त हस्ताक्षर के बाद ही याचिका राज्यसभा के सभापति अथवा लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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