इस वर्ष 245 आपदाओं में से 224 के पीछे का कारण था खराब मौसम
कोपेनहेगन, 14 दिसम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि वर्ष 2009 के प्रथम 11 महीनों के दौरान आईं 245 प्राकृतिक आपदाओं में से 224 आपदाएं मौसम के कारण थीं। इसके साथ ही इस अध्ययन में इन आपदाओं से निपटने के लिए इस समय जलवायु परिवर्तन पर चल रहे शिखर सम्मेलन में एक मजबूत समझौते की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
इस दौरान आपदाओं के कारण प्रभावित हुए कुल 5.80 करोड़ लोगों में से 5.50 करोड़ लोग मौसम संबंधी आपदाओं से प्रभावित थे।
वर्ल्ड मेट्रोलाजिकल आर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएमओ) और विश्व स्वास्थ्य संगठन की संस्था, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन द एपिडेमिओलॉजी ऑफ डिसास्टर्स (सीआरईडी) द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि इनमें से आधी आपदाएं एशिया में आईं थीं और ये मुख्यरूप से आंधी और बाढ़ के रूप में थीं।
इस वर्ष के आंकड़े में सूखे के कारण हुए नुकसान को नहीं शामिल किया गया है, क्योंकि इसमें काफी समय लगता।
ब्रसेल्स स्थित सीआरईडी की देबराती गुहा-सापिर ने कहा है कि उनके द्वारा जुटाए गए और विश्लेषित आंकड़े "वर्ष 1975 से लेकर अब तक जलवायु संबंधी आपदाओं में और पीड़ितों की संख्या में बढ़ोतरी का रुझान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं।"
गुहा-सापिर ने आईएएनएस को बताया, "हमने पाया है कि यह स्थिति ग्लोबल वार्मिग, कमजोर राजीतिक व्यवस्था, शहरीकरण, कमजोर अधोसंरचना, जनसंख्या में बढ़ोतरी और वनों की कटाई के कारण पैदा हुई है।"
डब्ल्यूएमओ के प्रमुख माइकल जेरौद ने कहा है कि इस अध्ययन ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित किया है कि यहां सात से 18 दिसंबर तक जलवायु परिवर्तन पर चलने वाले शिखर सम्मेलन में एक मजबूत समझौता हर हाल में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण करना है, क्योंकि वे आपदाओं के लिए बड़ा खतरा पैदा करती हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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