स्वाइन फ़्लू के लिए महामारी क़ानून

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में तेजी से पैर पसार चुके स्वाइन फ़्लू को काबू करने के लिए सरकार को महामारी क़ानून का सहारा लेना पड़ा है.
सरकार ने ये क़दम तब उठाया है जब स्वाइन फ़्लू से मरने वालों की तादाद बढ़ने लगी है.
हालाँकि सरकारी तौर स्वाइन फ़्लू से मरने वालों की संख्या का विवरण नहीं दिया गया है. मगर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ये बीमारी अब तक 90 से ज़्यादा लोगों को मौत की नींद सुला चुकी है.
सरकार पहले ही इसकी रोकथाम के पर्याप्त क़दम उठा चुकी है और अब एहतियात के तौर पर महामारी क़ानून लागू कर दिया गया है.
इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रस्ताव भेजा था जिसे मुख्यमंत्री ने शनिवार की रात मंज़ूरी दे दी. इस क़ानून के तहत ज़िला अधिकारियों को स्वाइन फ़्लू की रोकथाम के लिए ज़रूरी क़दम उठाने को अधिकृत किया गया है.
ज़रूरी अधिकार
ज़िला अधिकारी इस एक्ट के तहत ऐसे क़ानूनी उपाय लागू कर सकते हैं जो बीमारी को नियंत्रित करने की लिए आवश्यक हों.
इस क़ानून के तहत अब जिला अधिकारी निजी अस्पतालों की सेवाएँ ले सकते हैं. साथ ही संक्रमण रोकने के लिए सिनेमा हॉल जैसे सार्वजानिक स्थलों को बंद कराया जा सकता है.
मुख्यमंत्री गहलोत कह चुके हैं कि सरकार पहले ही इस रोग की रोकथाम के लिए प्रयोगशाला खोल चुकी है और संभाग स्तर पर भी प्रयोगशालाएँ खोली जाएंगी.
इस बीच, राज्य सरकार ने स्वाइन फ्लू जाँच की दरों को घटाकर आधा कर दिया है. गहलोत के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है.
उधर, विपक्ष ने सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है.
राजस्थान में दो बड़े शहरों राजधानी जयपुर और जोधपुर में स्वाइन फ़्लू का ज़्यादा असर देखा गया है. जोधपुर में हालात ऐसे बन गए थे कि सरकार को जयपुर से विशेषज्ञों की टीम वहाँ भेजनी पड़ी थी.












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