पूरी तरह सफल थे 1998 के परमाणु परीक्षण: काकोदकर

सीएनएन-आईबीएन के कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' में रविवार को करन थापर के साथ एक साक्षात्कार में काकोडकर ने कहा, "मैं समझता हूं कि यह पूरी तरह भरोसेमंद है। सेना को पूरी तरह भरोसा होना चाहिए। उनके पास जो शस्त्रागार है उसके बारे में जरा भी संदेह नहीं है।"
काकोडकर पूर्व सेना प्रमुख वी.पी.मलिक की उस टिप्पणी पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि परमाणु वैज्ञानिकों को परमाणु हथियारों की क्षमता के बारे में सेना को आश्वस्त करना चाहिए। वैज्ञानिक के.संथानम और पी.के.आयंगर के वर्ष 1998 के परमाणु परीक्षणों के विफल रहने के दावों का खंडन करते हुए काकोडकर ने परीक्षणों की समीक्षा की मांग को खारिज कर दिया।
संथानम को ज्यादा जानकारी नहीं
काकोडकर ने कहा कि आयंगर परीक्षणों के बारे बहुत कुछ नहीं जानते और संथानम परीक्षणों के बारे में जरूरत भर की जानकारी रखते हैं और वह भी सब कुछ नहीं जानते।
काकोडकर ने एईसी के प्रमुख के पद से 30 नवंबर को अवकाश ग्रहण किया। उनका दावा है कि भारत के पास सात परमाणु बम हैं और प्रत्येक की क्षमता 45 किलो टन से अधिक है। काकोडकर ने कहा कि तापीय परमाणु परीक्षण, विखंडन परीक्षण और उप किलो टन परीक्षण ठीक उसी रूप में संपन्न हुए हैं, जिस रूप में उन्हें डिजाइन किया गया था। इन परीक्षणों के परिणामस्वरूप भारत 200 किलो टन तक का बम बना सकता है।
काकोडकर ने कहा, "तापीय परमाणु परीक्षण के परिणाम को न केवल एक तरीके से, बल्कि विभिन्न सिद्धांतों पर आधारित कई तरीकों से सत्यापित किया गया था। इसकी व्यापक रूप से समीक्षा की गई है और वास्तव में 1998 में हुए परीक्षण को मैंने सफल करार दिया है और मैं अपनी इस बात पर अडिग हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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