चीन से घुसपैठ नहीं बढ़ी: एसएम कृष्णा

कृष्णा ने कहा कि वर्ष 1993 से दोनों सरकारें वास्तविक नियंत्रण रेखा के निर्धारण और सीमा प्रश्न पर अपनी-अपनी स्थितियों से पूर्वाग्रह रहित होकर भारत-चीन सीमा क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के साथ-साथ शांति और सद्भाव बनाने के लिए सहमत हुई हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श नहीं
कृष्णा ने कहा कि सरकार संयुक्त कार्य समूह, विशेषज्ञ समूह, सीमा कार्मिकों की बैठकें, ध्वज बैठकें तथा राजनयिक माध्यमों सहित स्थापित प्रणालियों के माध्यम से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर किसी प्रकार के उल्लंघन को चीनी पक्ष के साथ नियमित रूप से उठाती रहती है। कृष्णा ने कहा कि सरकार का विचार है कि भारत-चीन सीमा प्रश्न पूरी तरह से एक द्विपक्षीय मामला है तथा यह इस मुद्दे पर अन्य देशों अथवा अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ विचार-विमर्श करने के पक्ष में नहीं है।
गौरतलब है कि बुधवार को चीन के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि भारत कमजोर देश नहीं है। सरकार ने कहा कि किसी भी भावी खतरे से निपटने के लिए सीमा पर जरूरी अधोसंरचना विकसित की जाएगी। संसद में चीन पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कृष्णा ने बीजिंग को सभी दीर्घकालिक मुद्दों को सुलझाने के लिए एक-दूसरे की चिंताओं और आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील रहने के प्रति आगाह किया।












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