तेलंगाना का 'तूफान' पूर्वोत्तर पहुंचा

बीपीएफ के नेता हगराम मोहिलरी ने कहा, "अगर आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना का गठन किया जा सकता है तो फिर असम से अलग बोडोलैंड का गठन क्यों नहीं हो सकता।" एक वक्त मोहिलरी बोडो लिबरेशन टाइगर (बीएलटी) के प्रमुख थे। अलग राज्य की मांग को लेकर इस संगठन ने 1996 तक लड़ाई लड़ी थी और इसे प्रतिबंधित भी किया गया था।
वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने बीएलटी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था जिसमें बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद के गठन की बात कही गई थी और इस क्षेत्र के लोगों के लिए स्वायत्तता की बात भी शामिल थी। मोहिलरी ने कहा, "निश्चित तौर पर अब हम बोडोलैंड की मांग फिर से उठाने जा रहे हैं और हम अपनी अकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जनांदोलन भी छेड़ेंगे।"
इसी तरह की मांग ऑल असम दिमासा स्टुडेंट्स यूनियन और दिमासा पीपुल्स काउंसिल (डीपीसी) की ओर से भी गई है। इन संगठनों ने दिमासा जनजातियों को लेकर अलग 'दिमाराजी' राज्य के गठन की मांग रखी है। डीपीसी के अध्यक्ष मृणाल कांति फोंगलोसा ने कहा, "सरकार ने पहले कहा था कि राज्यों के भीतर राज्य अच्छा नहीं है, लेकिन अब केंद्र सरकार तेलंगाना के लिए सहमति जता रही है। हमें लगता कि हम लोगों को भी अपना अधिकार मिलना चाहिए। दिमाराजी सिर्फ हमारी मांग नहीं बल्कि जन्मसिद्ध अधिकार भी है।"
उधर, कारबी जनजाति की ओर से भी पृथक राज्य के गठन की मांग उठी है। नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के जनसंपर्क प्रमुख एस. संगजारंग ने कहा, "तेंगलाना की घटनाक्रम का इस क्षेत्र पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। जब तक अलग बोडोलैंड नहीं बन जाता तब तक स्थायी शांति नहीं हो सकती।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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