सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां पारदर्शी नहीं : आरटीआई कार्यकर्ता
नबील ए.खान
नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। सूचना आयुक्तों के चयन में पारदर्शिता नहीं बरते जाने पर प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ)और केंद्र सरकार को कानूनी नोटिस भेजने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं को अभी तक जवाब का इंतजार है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आवेदकों के एक समूह का प्रतिनिधित्व करने वाले कृष्णाराज राव ने मुंबई से फोन पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "जैसा कि हमने अपने कानूनी नोटिस में जिक्र किया है, आयुक्तों की नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती जाती है। हमने सूचना के अधिकार(आरटीआई) कानून की धारा 4 का सहारा लेने का फैसला किया है, जिसमें सूचना उपलब्ध कराए जाने को अनिवार्य किया गया है। हमने इस कानून के इस्तेमाल के लिए अदालत जाने का फैसला किया है। कानूनी नोटिस में इसका संकेत दे दिया गया है।"
केंद्र सरकार और पीएमओ को कानूनी नोटिस 26 नवंबर को भेजा गया। इसमें मांग की गई है कि सरकार आरटीआई कानून 2005 के दिशानिर्देशों का पालन करे। दिशानिर्देशों के मुताबिक सरकार के लिए मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया एवं अर्हता का खुलासा करना अनिवार्य है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि आयुक्तों के चयन में नियमों का पालन नहीं किया जाता और इसमें सरकार की पसंद या नापसंद को तवज्जो दी जाती है। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का निर्णय लेने वाली समिति में प्रधानमंत्री भी शामिल हैं।
राव ने कहा, "हमने पीएमओ को इसलिए कानूनी नोटिस भेजा है, क्योंकि हमें लगता है कि पीएमओ आरटीआई की धारा 4 (1) बी के मुताबिक मुख्य आयुक्त एवं आयुक्तों की नियुक्ति नहीं कर रहा है। नियुक्तियों की प्रक्रिया व अर्हता को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, पर सरकार की ओर से ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसे में हमने कोर्ट में जाने का फैसला किया है।"
उन्होंने कहा कि गोपनीयता की दलील की आड़ में सरकार ऐसी जिम्मेवारी से नहीं बच सकती। उनका मानना है कि ऐसी अपारदर्शिता असंवैधानिक है और देश के नागरिकों के लिए हितकर नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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