तेलंगाना के बाद गोरखालैंड की मांग ने जोर पकड़ा (लीड-1)

जीजेएम ने अपनी मांग को लेकर पहाड़ी क्षेत्र में चार दिवसीय बंद और भूख हड़ताल की घोषणा की है।

चिदंबरम से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में जसवंत सिंह ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री को आश्वासन दिया है कि बंद के दौरान शांति बनी रहेगी लेकिन उन्होंने कहा कि लोगों की भावनाओं को निश्चित तौर पर आवाज मिलनी चाहिए।

सिंह ने कहा कि देश में अलग राज्य के लिए चल रहे किसी भी आंदोलन में सबसे पुराना गोरखा राज्य की मांग है।

उन्होंने कहा, "मैंने जोर देकर कहा कि यह तेलंगाना मसले को लेकर पैदा हुए राजनीतिक हालात का फायदा उठाने की कोशिश नहीं है।"

सिंह ने कहा कि गोरखालैंड के मसले पर 21 दिसंबर को होने वाली त्रिपक्षीय बैठक दार्जीलिंग में आयोजित होनी चाहिए।

सिंह ने पत्रकारों से कहा, "यदि समय पर वैध और जायज मांगें पूरी हो जाएं तो उस मुद्दे पर विरोध या हिंसक विरोध की कोई आवश्यकता नहीं होती है।"

पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, "1907 से वहां इसकी मांग की जा रही है।"

उत्तरी पश्चिम बंगाल से एक हिस्सा अलग कर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने गुरुवार को 14-17 दिसम्बर के बीच भूख हड़ताल और बंद की घोषणा की है।

जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी ने आईएएनएस से कहा, "गोरखालैंड की मांग पुरानी है और सरकार को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि उसने तेलंगाना मुद्दे पर भी ऐसा ही किया है।"

सरकार ने 2005 में गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के नेतृत्व वाली दार्जीलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद(डीजीएचसी) को छठी अनुसूची का दर्जा दे दिया था, जिससे परिषद को अधिक स्वायत्तता मिल गई थी।

केंद्र सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश का विभाजन कर अलग तेलंगाना राज्य बनाने की स्वीकृति दिए जाने के बाद गोरखालैंड राज्य की मांग तेज हो गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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