'सरकार राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन करे'
प्रमुख कानूनविद् के.के. वेणुगोपाल ने शुक्रवार शाम वार्षिक डा. कैलाश नाथ काट्जू मेमोरियल लेक्चर-2009 में कहा, "सरकार के लिए यह आवश्यक है कि उच्च न्यायालयों एवं उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन करे जिसमें विपक्ष के नेता और प्रमुख कानूनविद् भी शामिल किए जाएं, जो बार एसोसिएशन के सदस्य न हों। इससे न्यायाधीशों की नियुक्ति में होने वाली देर से भी बचा जा सकेगा।"
उल्लेखनीय है कि प्रमुख न्यायविद्, स्वतंत्रता सेनानी, मंत्री एवं राज्यपाल रहे स्व. कैलाश नाथ काट्जू की याद में हर वर्ष एक सेमिनार का आयोजन किया जाता है। इस बार के सेमिनार का विषय था 'जजों की नियुक्ति'।
वेणुगोपाल ने कहा, "उच्च न्यायिक पदों पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन के अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स रिकार्ड एसोसिएशन वाले प्रसिद्ध मामले में द्वितीय जज के अपने फैसले पर भी पुनर्विचार करना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन ने पहले ही संविधान के 67वें संशोधन बिल को स्वीकार करने का प्रस्ताव पास कर दिया है, जिसमें स्वतंत्र न्यायाधिकरण की स्थापना का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स रिकार्ड एसोसिएशन मामले में दिया गया फैसला सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन के मत के सर्वथा विपरीत है,"
प्रमुख कानूनविद् फली नरीमन ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन के पास न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है, न ही वह न्यायाधीशों की नियुक्ति को वीटो कर सकती है। बार एसोसिएशन सिर्फ इतना ही कर सकती है कि वह न्यायविदों व न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार लोगों के ध्यान में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किये जाने वाले व्यक्ति की कमियों को ले आये ताकि वे उचित निर्णय ले सकें। न्यायिक संस्थान इसमें कार्यरत किसी भी न्यायाधीश से ज्यादा बड़ा है तथा न्यायालय की प्रतिष्ठा किसी भी व्यक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है, चाहे उसकी नियुक्ति हो या न हो।"
नरीमन ने कहा, "जस्टिस दिनाकरन की नियुक्ति के मामले में वकील लोग न्यायाधीशों से कोई संघर्ष में नहीं पड़ रहे थे। वे केवल उनके ध्यान में एक मामला लाना चाह रहे थे। वे न्यायाधीशों से कोई झगड़ा मोल लेने या विवाद में पड़ने के बजाए उनके ध्यान में कुछ बातें लाना चाह रहे थे जो शायद उनकी निगाह से नहीं गुजरीं थीं। राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन से वरिष्ठ न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी से बचा जा सकेगा और लोगों को शीघ्र न्याय मिल सकना संभव होगा।"
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा, "इस देश के हर नागरिक का अधिकार है कि उसे एक स्वच्छ न्यायिक व्यवस्था मिले। इस देश में अब मुकदमे दायर करना कोई अपवाद नहीं है। न्यायालय की शरण में जाने के लिए विवश लोगों को स्वच्छ न्यायिक व्यवस्था मिलनी ही चाहिए, और ऐसे लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। वे इसी उम्मीद के साथ न्यायालय में जाते हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा।"
चटर्जी ने कहा, "यह तो आधारभूत उम्मीद है कि न्यायाधीश ईमानदार हो जो देश के कानून के मुताबिक न्याय दे। सरकार का यह सबसे पहला एजेंडा होना चाहिए कि उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए तथा आचार संहिता बनाने के लिए एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।"
अन्य प्रमुख वक्ताओं में आउटलुक के प्रधान संपादक विनोद मेहता भी शामिल थे। पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे.एस. वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के बहुत से वकीलों, कानूनविदों, न्यायविदों तथा गणमान्य हस्ती मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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