उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अनिवार्य होगी अधिमान्यता
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा, "कानून का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और इस पर हम विभिन्न मंत्रालयों से बात कर रहे हैं। हम जल्दी ही इसे मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और उम्मीद करते हैं संसद के बजट सत्र (फरवरी 2010) में इसे पेश कर सकेंगे।"
एक बार कानून बन जाने के बाद उच्च शिक्षा के सभी संस्थानों को 'राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद' (एनएएसी) के तहत स्वयं को पंजीकृत कराना होगा। शिक्षा संस्थान चाहे डिग्री देते हों या डिप्लोमा या अन्य प्रमाणपत्र, चाहे उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से अनुदान मिलता हो या नहीं, सभी के लिए खुद को एनएएसी के तहत पंजीकृत कराना आवश्यक होगा।
उन्होंने कहा कि इसके पीछे का मकसद सभी उच्च शैक्षिक संस्थानों के लिए अधिमान्यता को अनिवार्य बनाना है।
सिब्बल ने कहा कि एनएएसी ने सात स्तरीय प्रत्यायन प्रक्रिया को चुना है। पहले स्तर में पाठ्यक्रम पहलुओं, दूसरे स्तर में शिक्षण, सीखना और मूल्यांकन, तीसरे स्तर में अनुसंधान, परामर्श और विस्तार, चौथे स्तर में बुनियादी ढांचे और सीखने के संसाधन, पांचवे स्तर में छात्रों का समर्थन और प्रगति, छठे स्तर में प्रशासन और नेतृत्व और सातवें स्तर पर अभिनव अभ्यासों को रखा गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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