जायज है गोरखालैंड की मांग: जसवंत सिंह
जसवंत सिंह ने पत्रकारों से कहा, "यदि समय पर वैध और जायज मांगें पूरी हो जाएं तो उस मुद्दे पर विरोध या हिंसक विरोध की कोई आवश्यकता नहीं होती है।"
पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि गोरखालैंड की मांग पुरानी और जायज है।
उन्होंने कहा, "1907 से वहां इसकी मांग की जा रही है।"
उत्तरी पश्चिम बंगाल से एक हिस्सा अलग कर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने गुरुवार को 14-17 दिसम्बर के बीच भूख हड़ताल और बंद की घोषणा की है।
जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी ने आईएएनएस से कहा, "गोरखालैंड की मांग पुरानी है और सरकार को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि उसने तेलंगाना मुद्दे पर भी ऐसा ही किया है।"
सरकार ने 2005 में गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के नेतृत्व वाली दार्जीलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद(डीजीएचसी) को छठी अनुसूची का दर्जा दे दिया था। जिससे परिषद को अधिक स्वायत्ता मिल गई थी।
केंद्र सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश का विभाजन कर अलग तेलंगाना राज्य बनाने की स्वीकृति दिए जाने के बाद गोरखालैंड राज्य की मांग तेज हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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