अंग्रेजी को मलेशिया की दूसरी राजभाषा बनाने की मांग
कुआलालंपुर, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। एक प्रभावशाली मलेशियाई भारतीय सांसद ने मलेशियाई संविधान में संशोधन कर अंग्रेजी को देश की दूसरी राजभाषा बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी को सरकारी काम-काज की भाषा बनाने के सकारात्मक नजीते निकलेंगे।
बहासा मलेशिया को अदालतों एवं सरकारी दस्तावेंजों की भाषा के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के एक अदालती फैसले पर डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी(डीएपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद करपाल सिंह ने कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं है कि बहासा मलेशिया देश के लोगों को एक सूत्र में पिरोती है, लेकिन सच यह भी है कि अंग्रेजी ही ऐसी भाषा है जो पूरी दुनिया में राष्ट्रों को जोड़ती है।"
उन्होंने कहा कि अदालती कामकाज में अंग्रेजी को उसका हक नहीं दिए जाने से विदेशी निवेशकों व बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश की अदालतों में विवादों को सुलझाने की बजाए मध्यस्थों की मदद से विवाद सुलझाने को बाध्य होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे देश की न्यायपालिका का विश्वास डगमगा रहा है। उन्होंने 'द न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स' से बातचीत में कहा कि देश में अंग्रेजी बोलने की संख्या भी अच्छी है, इसलिए इसे दूसरी राजभाषा बनाना उपयुक्त कदम होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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