ब्रिटेन में पंजाबी शादियों में शराब का चलन सामाजिक समस्या बना गया है
दीपांकर डे सरकार
लंदन, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। ब्रिटेन में रहने वाले पंजाबियों को एक ऐसे समुदाय के तौर पर चिन्हित किया गया है जो शादियों में हद से ज्यादा जाम छलकाने के आदी बन गया है। शादियों में शराब परोसने का चलन इतनी जड़ जमा चुका है कि शराब से परहेज करने वाले परिवारों को भी दबाव में शराब परोसनी पड़ती है।
पश्चिमी लंदन के एक दातव्य संगठन के मुताबिक अधिकांश पंजाबी यह मानते हैं कि यह चलन इतनी जड़ जमा चुका है कि वर पक्ष के लोग इसे दहेज की तरह ही अनिवार्य समझने लगे हैं। वधू पक्ष को उम्दा शराब परोसने के लिए बाध्य किया जाता है।
साउथॉल स्थित ड्रग एंड अल्कोहल प्रोग्राम(डैप) ने अब ऐसे लोगों की सूची बनाकर वेबसाइट पर डालने की योजना बनाई है जो शादी में शराब परोसने के लिए वधू पक्ष पर दबाव डालते हैं। खासकर, सिखों में यह समस्या ज्यादा जड़ जमा चुकी है।
संगठन ने गुरुद्वारों के सहयोग से इस समस्या से निपटने की योजना बनाई है। डैप की मुख्य कार्यकारी परमिंदर ढिल्लन कहती हैं, "लड़के वाले यह समझते हैं कि शराब पीना उनका अधिकार है और शराब परोसना लड़की वाले का कर्तव्य है। मेरे पास ऐसे ढेर सारे उदाहरण हैं।"
उन्होंने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की उस रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि ब्रिटेन में दक्षिण एशियाइयों में शराबखोरी के कारण गुर्दा खराब होने से मौत की दर दूसरे जातीय समूहों से चार गुना ज्यादा है।
शराब से मरने वाले दक्षिण एशियाइयों में से 80 फीसदी सिख होते हैं। डैप और स्थानीय गुरुद्वारों ने अगले साल साउथॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमें इस समस्या के खिलाफ सामुदायिक हस्तक्षेप किया जाएगा।
जर्नल लिखता है, "ब्रिटेन की कुल आबादी में जातीय अल्पसंख्यकों की संख्या आठ फीसदी है, लेकिन शराबखोरी से इस समुदाय को होने वाले नुकसान को लेकर ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ब्रिटेन को अल्कोहल के कारण हर साल 20 अरब पाउंड का नुकसान होता है, पर इसमें जातीय अल्पसंख्यकों के योगदान के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गलत धारणाएं स्वास्थ्य नीतियों का आधार बन जाती हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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