गोवा में चर्च से जुड़े संगठन ने इजरायली-विरोधी किताब प्रकाशित की
पणजी, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। यह एक ऐसी किताब है जिस पर हर इजरायली को घोर आपत्ति हो सकती है। गोवा में चर्च से जुड़े एक संगठन द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक में इजरायली पर्यटकों को ऐय्याश, भोगी, मक्खीचूस, नशेड़ी और ड्रग तस्कर करार दिया गया है।
"क्लेमिंग द राइट टू से नो : ए स्टडी ऑफ इजरायली टूरिस्ट बिहेवियर एंड पैटर्न्स इन गोवा" नामक इस पुस्तक में इजरायली पर्यटकों के व्यवहार और स्वभाव का विश्लेषण करते हुए उनके लिए एक से बढ़कर एक आपत्तिजनक विशेषणों का इस्तेमाल किया है। 96 पृष्ठों की इस पुस्तक को 11 उभरते पादरियों ने लिखा है। पुस्तक का प्रकाशन गोवा में रोमन कैथलिक चर्च की एक शाखा काउंसिल फॉर सोशल जस्टिस एंड पीस(सीएसजेपी) ने किया है। शांति और सामाजिक न्याय की वकालत करने वाले इस संगठन की यह पुस्तक नया विवाद खड़ा कर सकती है।
इजरायलियों के बारे में ऐसी राय को आधार देने के लिए पादरियों ने खुद एक सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षण के तहत इजरायली पर्यटकों का पीछा कर उनके व्यवहार और आदतों का अध्ययन किया गया। पुस्तक के पहले ही अध्याय में ब्रदर माइरॉन जेसन बरेटो लिखते हैं, "एक दिन शाम को हम अंजुना गए। हमें खबर मिली कि इजरायलियों का दल अरंबोल गया है। हमने उनका पीछा ऐसे किया मानों बिल्ली-चूहे का खेल हो।"
गोवा के आर्कबिशप फिलिप नेरी फेरो द्वारा रविवार को इस पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक चर्च-समर्थित स्टालों पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसके एक अध्याय में ब्रदर मैनुअल डीसूजा लिखते हैं, "इजरायलियों की रात कभी खत्म नहीं होती। वे मादक पदार्थो एवं शराब के नशे में संगीत पर बेलगाम थिड़कते हैं। वे खुलेआम एक-दूसरे का चुंबन लेते हैं और एक-दूसरे को सहलाते हैं। उन्हें पार्टनर बदलने में भी गुरेज नहीं है।"
डीसूजा द 'द सबाबा एक्सपीरिएंस' नामक अध्याय में लिखते हैं, "नौकरियां करते वक्त ये इजरायली सनकी हो जाती हैं। सरकार उन्हें विश्रांति केंद्रों में भेजती है, ताकि उनकी सनक दूर हो। गोवा इन लोगों के लिए एक प्रमुख विश्रांति केंद्र है। वे गोवा के पालोलेम बीच पर हर किसी के लिए पेरशानी पैदा करते हैं। आखिर, ऐसे लोगों की हमें जरूरत क्या है?"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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