'अमरीकी सैनिकों की वापसी निश्चित नहीं'

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में बाहरी सैन्य मौजूदगी लंबे समय तक खिच सकती है. गत सप्ताह अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान से जुलाई, 2011 से अपनी सेनाएँ वापस बुलाना शुरू कर देगा.
अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सफ़ाई दी है कि ओबामा की घोषित समय सीमा का कोई अंतिम बिंदु नहीं है जिसके बाद कुछ नहीं होगा. अमरीकी रक्षा मंत्री रोबर्ट्स गेट्स ने कहा कि राष्ट्रपति ने 'एक प्रक्रिया की शुरुआत" की घोषणा की है.
' गलत संदेश '
अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी ने बराक ओबामा की घोषित समय सीमा को स्वैच्छिक बताया है और कहा है कि इससे तालेबान को बढ़ावा मिल सकता है. सीनेट सदस्य जॉन मेक्केन ने कहा है कि इससे चरमपंथियों के बीच ग़लत सन्देश जाएगा.
अफ़ग़ानिस्तान में भी ऐसी चिंता व्यक्त की जा रही है कि वहाँ की मौजूदा सरकार अमरीका के देश से बाहर होने की सूरत में हालात पर काबू न रख पाएगी. अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद पत्रकारों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस समय हालत बहुत गंभीर हैं. तालेबान लगातार ताकतवर होते जा रहे हैं और अफ़ग़ानिस्तान के अपने सुरक्षाबल हालात का सामना करने में सक्षम नहीं हैं.
अमरीकी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'कोई समयसीमा नहीं है' और ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखकर ही क्रमवार तरीके से अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़ों को स्थानीय अधिकारियों के हवाले किया जाएगा. रक्षा मंत्री ने कहा कि अमरीकी सैनिक क्रमवार तरीके से ही वापस बुलाए जाएँगे और अमरीका हालात पर नज़र बनाए रखेगा.
गेट्स का कहना था, " राष्ट्रपति ने अपने सन्देश से न केवल अमरीकी दृढ़ता का परिचय दिया बल्कि अफ़ग़ान सरकार को ये अहसास दिलाने की कोशिश भी की कि उसे अपनी सेनाओं को बढ़ाने, प्रशिक्षण और सुरक्षा बलों की तैनाती को गंभीरता से लेना होगा."












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