छत्तीसगढ़ में हीरे के अवैध खनन को शराबखोरी से बढ़ावा
सुजीत कुमार
रायपुर, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। गरीब जनजातीय लोगों में शराब की बेलगाम चाहत को भांप चुके दलाल और व्यापारी हीरे के अवैध खनन से फल-फूल रहे हैं।
ऐसे जनजातीय लोगों की मदद से छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में हीरे के अवध खनन को अंजाम दिया जा रहा है, वहीं प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अपेक्षित सख्ती नहीं बरत रहा है।
पुलिस का दावा है कि वह भरपूर चौकसी बरत रही है। मैनपुर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि ये व्यापारी और दलाल जनजातीय लोगों को पैसे का लोभ देकर रायपुर के पैलीखंड गांव से बोरियों में मिट्टी भरकर लाने को प्रेरित करते हैं। यहां की मिट्टी में हीरा होने की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है। मुंबई और सूरत के हीरा व्यापारियों ने यहां डेरा डाल रखा है। जनजातीयों को एक बोरी मिट्टी के एवज में करीब 100 रुपए दिए जाते हैं। इस रकम का इस्तेमाल वे घरेलू जरूरतों पर कम, शराब की ललक पूरी करने पर ज्यादा करते हैं।
राज्य सरकार ने एक निजी कंपनी बी. विजयकुमार छत्तीसगढ़ एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2000 में यहां हीरा खनन का लाइसेंस दिया था, पर एक साल बाद कंपनी का ठेका रद्द कर इलाके को घेर दिया गया। वहां सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। कंपनी ने सरकार के फैसले को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दे रखा है। इलाका नक्सलवाद प्रभावित है। जुलाई में अचानक यहां से सुरक्षा हटा ली गई। वैसे, पुलिस का कहना है कि इसकी जगह और तगड़ी सुरक्षा की योजना है।
अधिकारियों का कहना है कि 18 हेक्टेयर में फैली इस हीरा खदान पट्टी को व्यापक सुरक्षा घेरे में लिए जाने की योजना है। रायपुर के पुलिस प्रमुख अमित कुमार कहते हैं, "हमने यहां गश्त तेज कर दी है। जो कोई भी इस स्थल पर पकड़ा जाएगा उसे हिरासत में ले लिया जाएगा। कोई भी व्यक्ति जिला प्रशासन की अनुमति के बिना वहां नहीं जा सकता।" स्थानीय सांसद चंदूलाल साहू ने यहां से सुरक्षाकर्मियों को हटाने पर हैरत प्रकट किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications