भारत में 2030 तक श्रमशक्ति में 22 करोड़ की बढ़ोतरी होगी : आरबीआई
एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुख्य कार्यकारियों के एक फोरम को संबोधित करते हुए सुबीर गोकर्ण ने कहा, "रोजगार बाजार में श्रमिकों की खपत नीति नियंताओं के लिए कठिन चुनौती खड़ी करेगी, क्योंकि वे सामूहिक विकास के लक्ष्यों के साथ वैश्वीकरण की ताकतों को संगठित करने की कोशिश करेंगे।"
'आईसीसी रीजनल सीईओ फोरम' इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कामर्स द्वारा आयोजित किया गया था।
गोकर्ण ने कहा कि दक्षिण एशियाई और पूर्व एशियाई क्षेत्र की जनसांख्यिकी उसी तरह काम करेगी, जिस तरह चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और विएतनाम बड़ी संख्या में रोजगार चाहने वालों को पैदा करेंगे।
गोकर्ण ने कहा, "इसके साथ ही श्रम केंद्रित गतिविधियां स्वचालित मशीनों की ओर मुड़ जाएंगी तथा उद्योग कम मजदूरी पर श्रमशक्ति मिलने वाले स्थानों पर स्थानांतरित हो जाएंगे। यह स्थिति राष्ट्रीय सरकार पर दबाव बनाएगी कि वह संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए अपने तैयारी के स्तर को बढ़ाएं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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