शीघ्र इलाज से जल्दी स्वस्थ होते हैं मस्तिष्काघात के मरीज
मस्तिष्काघात से मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है जिसकी वजह से बातचीत करने और समझने में स्थायी समस्या पैदा हो सकती है। परंतु शीघ्र गहन चिकित्सा से मरीजों को अधिक शब्दों का उपयोग करने और बेहतर समझ विकसित करने व मौखिक वार्तालाप को अच्छा बनाने में मदद मिलती है।
'कर्टिस स्कूल ऑफ सायकोलॉजी एंड स्पीच पैथोलॉजी' की शोधकर्ता इरिन गॉडेक का कहना है, "मस्तिष्काघात के मरीजों की संचार क्षमता प्राय: प्रभावित हो जाती है, जिसे 'वाचाघात' (एफेजिया) कहते हैं। इस स्थिति के लिए उन्हें बहुत सीमित उपचार मिलता है।"
'वाचाघात' से पीड़ित व्यक्ति में शब्दों को बोलने, समझने और पढ़ने-लिखने की क्षमता प्रभावित होती है, जो कि उसके लिए बेहद निराशाजनक स्थिति होती है। यदि इलाज की शुरुआती अवस्था में इस पर ध्यान दिया जाए तो प्रति सप्ताह केवल 11 मिनट के लिए विशेष चिकित्सा देना होगी।
शोधकर्ता का कहना है, "आघात में बचे और वाचाघात से जूझ रहे मरीजों में कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं और उनके तीन गुना अधिक अवसाद से ग्रस्त होने की समस्या रहती है।"
मस्तिष्काघात के सभी मरीजों में शुरुआती अवस्था में संचार दिक्कतों का पता नहीं चल पाता है। इसके परिणामस्वरूप उन्हें तुरंत उसका इलाज नहीं मिल पाता है।
उन्होंने कहा, "हमारे अध्ययन में पाया गया है कि इलाज से मरीजों की संचार क्षमता बेहतर होती है और इससे उनके जीवन को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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