श्रीलंका में राजनीतिक प्रक्रिया बहाल की जानी चाहिए : भारत (राउंडअप)
नई दिल्ली, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि वह चाहता है कि श्रीलंका में शांति प्रक्रिया बहाल की जाए, जो दो दशक लंबे गृहयुद्ध के बाद तमिल नागरिकों सहित सभी संबंधित लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे। इसके साथ ही भारत की ओर से यह भी कहा गया कि वह इस पूरी प्रक्रिया के दौरान श्रीलंका के साथ जुड़ा रहेगा।
कोलंबो ने भारत को भरोसा भी दिलाया है कि दो दशक तक चले गृह युद्ध के दौरान विस्थापित हुए तमिल नागरिकों का जनवरी 2010 तक पुनर्वास कर दिया जाएगा।
पार्टी राजनीति से ऊपर उठ कर राज्यसभा सदस्यों ने शुक्रवार को उत्तरी श्रीलंका के हालात पर चिंता जताई और केंद्र सरकार से इस मामले में अतिरिक्त पहल करने का आग्रह किया। राज्यसभा सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर सरकार सोमवार को जवाब देगी।
विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने राज्यसभा में कहा, "सरकार श्रीलंका में राजनीतिक प्रक्रिया की बहाली देखना चाहती है जो एकीकृत श्रीलंका के दायरे में तमिलों व मुसलमानों सहित सभी समुदायों के वैधानिक हितों और अपेक्षाओं को पूरा करेगी।"
कृष्णा ने कहा कि इस प्रकार की राजनीतिक प्रक्रिया की बहाली और आपसी संवाद अल्पसंख्यक समुदायों को मुख्यधारा में लाने में मददगार साबित होगी।
अपना बयान जारी करते समय सरकार ने उस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया, जिसे दक्षिणी राज्यों के कुछ सांसदों ने सौंपा था।
कृष्णा ने यह भी कहा कि भारत सरकार इस बात पर जोर देती रहेगी कि श्रीलंका सरकार सार्थक हस्तातंरण पैकेज लाए जो 13वें संशोधन के दायरे से आगे जा सके। उन्होंने कहा कि इस हस्तांतरण और सुधार की प्रक्रिया में हम श्रीलंका सरकार के साथ बने रहेंगे।
कृष्णा ने कहा कि शिविरों में रह रहे 300,000 विस्थापितों में से आधे से अधिक लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है, जबकि लगभग 145,000 लोग अभी भी शिविरों में रह रहे हैं। शिविरों में रह रहे लोगों पर बाहर-आने जाने पर लगे प्रतिबंध में भी ढील दे दी गई है।
कृष्णा ने आगे कहा, "हमें भरोसा दिलाया गया है कि जनवरी 2010 तक सभी विस्थापितों का पुनर्वास कर दिया जाएगा। सभी का पुनर्वास सुनिश्चित कराने के लिए हम श्रीलंका सरकार के साथ काम जारी रखेंगे।"
भारत ने उत्तरी श्रीलंका में विस्थापितों के पुनर्वास और लोगों के कल्याण के लिए 500 करोड़ रुपये का बंदोबस्त कर रखा है। लेकिन सरकार के जवाब से असंतुष्ट खासतौर से विपक्षी सदस्यों ने श्रीलंका में तमिल शरणार्थियों के मुद्दे पर सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एम.वेंकैया नायडू ने कहा, "कोई युद्ध तो जीत सकता है लेकिन शांति खो देगा। ऐसा मत समझिए कि यह मुद्दा सुलझ गया है। इसके ठोस समाधान की आवश्यकता है अन्यथा यह मुद्दा फिर से जिंदा होगा और इसका परिणाम विनाशकारी होगा।"
आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के के.मलयसामी ने विस्थापित श्रीलंकाई नागरिकों का तमिलनाडु में पुनर्वास करने की राज्य सरकार की मंशा पर सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के हाथों में खेल रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी.राजा ने कच्चाथिवु समझौते को बहाल करने और श्रीलंका के आसपास भारतीय मछुआरों की अधिक पहुंच सुनिश्चित कराने का आग्रह किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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