भोपाल में विकास नीति के खिलाफ संघर्ष का ऐलान

भोपाल, 2 दिसंबर (आईएएनएस)। भोपाल गैस कांड जैसे हादसों का कारण बनने वाली विकास नीति को जन संगठनों ने विनाश की नीति करार दिया और इसके विरुद्ध राष्ट्रव्यापी संघर्ष का ऐलान किया। देश भर से जुटे जनांदोलनों और जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि वे इस बात के लिए संघर्ष करेंगे कि दुनिया में भोपाल जैसा दूसरा कांड न हो।

जन संघर्ष मोर्चा और भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन ने भोपाल गैस हादसे की 25वीं बरसी पर शाहजहांनी पार्क में विनाशकारी औद्योगीकरण एवं विकृत विकास विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया।

इस संगोष्ठी में पहुंची सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई)की निदेशक सुनीता नारायण ने कहा, "जो विकास हमें भोपाल जैसे हादसे देता है ऐसा विकास हमें नहीं चाहिए। इतना ही नहीं विकास से हुए जलवायु परिवर्तन ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। हर देश सोचने लगा है कि विकास से इतना बड़ा प्रलय भी हो सकता है।"

मशहूर शिक्षाविद् डॉ. अनिल सद्गोपाल ने वैश्विक पूंजीवाद पर भोपाल गैस कांड को भोपाल और भारत की बड़ी त्रासदी बताते हुए कहा कि इस कर्ज को अब तक नहीं चुकाया गया है।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष जनक लाल ठाकुर, आजादी बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष डॉ बनवारी लाल शर्मा, नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल, समाजवादी जन परिषद के उपाध्यक्ष सुनील, भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार, डॉ सुरेंद्र गाडेकर और अन्य लोगों ने सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की।

स्ांगोष्ठी में हिस्सा लेने पहुंचे प्रतिनिधियों ने 'भोपाल घोषणा' के नाम से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की गई है। साथ ही इस दौरान यह संकल्प लिया गया कि इस बात के लिए संघर्ष किया जाएगा कि दोबारा भोपाल जैसी त्रासदी न हों।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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