गोर्शकोव पर बातचीत अंतिम चरण में : नौसेना प्रमुख
वर्मा ने संवाददाओं को बताया, "हम बातचीत के अंतिम चरण में हैं। चौथे दौर की बतचीत समाप्त हो चुकी है।"
लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि क्या रविवार से शुरू हो रही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रूस यात्रा के दौरान यह सौदा अपने निष्कर्ष पर पहुंच जाएगा, इस पर वर्मा ने कहा कि वह इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं करना चाहेंगे।
वर्मा ने कहा, "यह सच है कि इस परियोजना में काफी देरी हुई है। लेकिन वर्ष 2012 तक इस पोत की आपूर्ति हमें कर दी जाए, इसके मद्देनजर हम अपने कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं।"
वर्मा ने नौसेना दिवस (चार दिसंबर) के पूर्व यहां संवाददाताओं को बताया, "काम रुका नहीं है। काम तेजी के साथ चल रहा है। रूस द्वारा पर्याप्त संसाधन लगाए गए हैं।"
शुरुआती समझौते के अनुसार गोर्शकोव को मुफ्त में उपहार स्वरूप भेंट किया जाना था, लेकिन भारतीय नौसेना की जरूरतों के मुताबिक इसमें सुधार के लिए भारत को 97.40 करोड़ डॉलर का भुगतान करना तय किया गया।
बाकी 1.5 अरब डॉलर का सौदा 16 मिग लड़ाकू विमानों और पनडुब्बी रोधी, कैमोव युद्धक हेलीकॉप्टरों के लिए था, जिन्हें पोत पर तैनात किया जाना था।
लेकिन वर्ष 2007 में रूस ने कहा कि उससे जोड़-घटाव में गलती हो गई है और इस तरह उसने 1.2अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि की मांग की।
हाल में रूस की ओर से बिल में 70 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि और जोड़ दी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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