बच्चों को समय से पहले परिपक्व बनाने की कोशिश नुकसानदेह

छोटे बच्चे चुलबुले और अधीर होते हैं एवं उन्हें रोचक से रोचक कार्यो पर भी ध्यान केंद्रित करने में संघर्ष करना पड़ता है। बच्चों का कोमल मन किसी दिलकश रंगीन खिलौने के लिए मचल सकता है, पर ऐसा तभी तक होता है जब तक कोई दूसरा नया खिलौना उनकी आंखों के समाने से न गुजरे।

कोई दूसरा नया खिलौना देखकर वे पहले वाले खिलौने को भूल जाते हैं। बच्चों की यह प्रवृत्ति शिक्षकों या अभिभावकों के गुस्से का सबब बन जाती है। ऐसी स्थिति में अभिभावक या शिक्षक बच्चे की चाहत पर लगाम लगाने की कोशिश करते हैं जो उनके व्यक्तित्व विकास को कुंद करती है।

क्या बच्चों में स्व-अनुशासन की भावना पैदा करने की कोशिश की जानी चाहिए? कुछ मनोचिकित्सकों का मानना है कि बच्चों को समय से पहले परिपक्व ता की ओर जबरन धकेलना नुकसानदेह है।

पेनिनसिल्वानिया विश्वविद्यालय में तंत्रिका मनोचिकित्सक शैरोन थॉम्पसन-स्किल एवं उनके सहयोगियों ने असंगत सूचनाओं को दिमाग से बाहर करने वाले दिमागी हिस्से परफ्रॉन्टल कोरटेक्स(पीएफसी) का अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है।

यह दिमाग का ऐसा हिस्सा है जो सबसे अंत में परिपक्व होता है। चार वर्ष की उम्र तक यह परिपक्व ता के मामले में सभी दिमागी हिस्सों से पीछे रहता है। बच्चों पर ज्यादा दबाव डालने से यही हिस्सा प्रभावित होता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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