बेंगलुरू खेल स्पर्धा में 'मानवीय भावना' की जीत हुई
विकलांगों के लिए आयोजित इस आठ दिवसीय खेल स्पर्धा के समापन पर इंडियन व्हीलचेयर रग्बी टीम के कोच राजीव विराट ने आईएएनएस से कहा, "यह बात कोई मायने नहीं रखती कि कौन जीता या कौन हारा, अंतत: जीत मानवीय भावना की हुई है।"
तैराक शरत गायकवाड़ ने कहा, "यहां हार और जीत ज्यादा मतलब नहीं रखती। यहां आए सभी खिलाड़ी महान और अनूठे थे। उन सभी ने अच्छा खेला और सभी बाधाओं के बावजूद धैर्य और संकल्प का परिचय दिया।"
बेंगलुरू के 18 वर्षीय तैराक ने घरेलू दर्शकों के सामने दो स्वर्ण, पांच रजत और एक कांस्य पदक जीतकर भारतीय टीम को गौरवान्वित किया। जन्म के समय से ही शरत का बायां हाथ ठीक से काम नहीं करता था। शरत महसूस करते हैं कि यदि कोई व्यक्ति संकल्पित हो तो खेल के क्षेत्र में शारीरिक विकलांगता बाधा नहीं बन सकती।
इस खेल स्पर्धा में चीन ने 47 स्वर्ण, 18 रजत और छह कांस्य पदक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। जबकि भारतीय खिलाड़ी 32 स्वर्ण, 38 रजत और 40 कांस्य पदक पाकर द्वितीय स्थान पर रहे।
थाईलैंड तृतीय स्थान पर रहा। उसे 26 स्वर्ण, 18 रजत और 17 कांस्य पदक प्राप्त हुए।
आईडब्ल्यूएएस ने 'पैरओलंपिक कमेटी ऑफ इंडिया' (पीसीआई) के सहयोग से इस अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा का आयोजन किया था।
स्पर्धा में 43 देशों के 604 एथलीट शामिल हुए थे, जिन्होंने 11 विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैठकर खेली जाने वाली वालीबॉल, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर रग्बी, बैडमिंटन, गोल्फ, पॉवर लिफ्टिंग, व्हीलचेयर फेन्सिंग, निशानेबाजी और तैराकी शामिल हैं।
पीसीआई के अध्यक्ष रतन सिंह ने कहा, "सभी खिलाड़ियों में किसी न किसी प्रकार की शारीरिक विकलांगता थी। कुछ गंभीर विकलांगता से ग्रस्त थे। लेकिन वह इससे विचलित नहीं थे और एक सच्चे खिलाड़ी के रूप में उन्होंने जीत हासिल की। हम उनकी खेल भावना को सलाम करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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