गैस पीड़ितों के लिए स्थापित अस्पताल समस्याओं से ग्रस्त
भोपाल, 2 दिसम्बर (आईएएनएस)। जब वर्ष 2000 में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) की स्थापना की गई थी तो गैस पीड़ितों में उम्मीद की किरण जगी थी, पर जल्द ही यह अस्पताल कई समस्याओं की चपेट में आ गया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यहां इलाज के लिए आने वाले गैस पीड़ितों की उपेक्षा की जाती है। एक गैर सरकारी संगठन भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के सईद मोहम्मद इरफान कहते हैं, "चूंकि अस्पताल में गैर गैस पीड़ितों का भी इलाज होता है, इसलिए यहां का प्रशासन गैस पीड़ितों के प्रति उदासीन और कुछ हद तक संवेदनशून्य है।
गैर गैस पीड़ित यहां शुल्क चुकाकर इलाज कराते हैं, जबकि गैस पीड़ितों के लिए नि:शुल्क इलाज का प्रावधान है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन शुल्क चुकाने वाले मरीजों का ही खास ख्याल रखने लगा है।"
गैस रिसाव कांड से प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए एक अस्पताल चलाने वाले संगठन संभावना ट्रस्ट के सतीनाथ सारंगी कहते हैं, "सच यह है कि पचास प्रतिशत से भी कम भुक्तभोगी इस अस्पताल में पंजीकृत हैं।
गैस पीड़ित महिलाओं के लिए यहां अलग से महिला वार्ड नहीं है और न ही अलग बच्चा वार्ड है, जहां गैस पीड़ित महिलाओं के बच्चों को भर्ती किया जा सके। गैस रिसाव के कारण जल प्रदूषण का शिकार हुए लोगों को यहां नि:शुल्क इलाज नहीं दिया जाता। फिर इसे हम गैस पीड़ितों का अस्पताल क्यों कहें?" यहां विशेषज्ञ डाक्टरों का भारी अभाव है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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