मोबाइल से होगा एपेंडेसाइटिस का इलाज

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में न्यूरोरेडियोलॉजी विभाग में फिजिशियन एवं इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले असीम एफ. चौधरी ने कहा, "ऐसी तकनीकी पर अमल का उद्देश्य समय रहते रोग का सटीक इलाज करना है। इससे डाक्टरों के बीच परामर्श की प्रक्रिया भी तेज होगी।"
एपेंडेसाइटिस यानी एपेंडिक्स में सूजन की बीमारी होने पर मरीज को ऑपरेशन के दौर से गुजरना पड़ता है। अगर इसका समय रहते इलाज नहीं हुआ तो एपेंडिक्स फट सकता है और इस थैली में भरा जहरीला पदार्थ शरीर में फैलकर मरीज की मौत का सबब बन सकता है।
जब किसी मरीज को आपात वार्ड में लाया जाता है तो उसकी कंप्यूटेड टोमोग्राफी(सीटी) एवं शारीरिक जांच की जाती है। अगर तुरंत कोई रेडियालॉजिस्ट मौके पर मौजूद नहीं होता तो सीटी इमेज का त्वरित अध्ययन नहीं हो पाता और देर होने से एपेंडिक्स के फटने या मरीज की हालत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तस्वीरों को मोबाइल के जरिए रेडियोलॉजिस्ट तक पहुंचाकर मरीज का उपयुक्त समय पर इलाज किया जा सकता है। खासकर सुदूर इलाकों के लिए यह ज्यादा उपयोगी है। अध्ययन निष्कर्ष को रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नार्थ अमेरिका के सालाना सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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