शैल चित्रों में मिलीं भारत में विचरने वाली प्रजातियां
जिराफ जैसे दिखने वाले 'सिवाथिरियम' के दो जोड़ी सींग हैं और 8,000 साल पहले यह विलुप्त हो गया था। इसी तरह यहां 'आर्डवर्क' के शैल चित्र हैं। यह चींटियां खाने वाली प्रजाति अब केवल अफ्रीका में मिलती है।
महाराष्ट्र के अमरावती के निकट 65 गुफाओं में बने 18 शैल चित्र शताब्दियों से यहीं छुपे हुए थे। पिछले तीन वर्षो के दौरान शौकिया खोजकर्ताओं ने इनकी खोज की है। इनमें से अंतिम चट्टान को जून में खोजा गया था। अब यहां पर चल रहा शोध कार्य लोगों की आंखें खोल रहा है।
अमरावती जिले की मोरशी तहसील में सात वर्षो की खुदाई के बाद एक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य वी. टी. इंगोल के नेतृत्व में छह सदस्यों के एक समूह ने इन शैल चित्रों को समझा है।
इंगोल ने आईएएनएस से कहा, "यह देश में इस तरह की दूसरी खोज है। यह शैल चित्र 15,000 वर्ष पुराने हैं या आरंभिक पाषाण युग से संबंध रखते हैं।"
इस समूह द्वारा जो खोजें की गई हैं उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और आगरा स्थित 'रॉक आर्ट सोसायटी ऑफ इंडिया' को सौंप दिया गया है। जो शोध द्वारा इस समूह की खोजों की पुष्टि करेंगे।
इससे पहले 1957 में भोपाल के निकट भीमबेटका में ऐसे ही शैल चित्रों की खोज हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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