चण्डीगढ़ पर प्रशासनिक नियंत्रण खोना नहीं चाहता पंजाब
चण्डीगढ़, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। केंद्र शासित क्षेत्र चण्डीगढ़ को सिर्फ पंजाब की राजधानी बनाए जाने के करीब पांच दशक पुराने वादे को नहीं भुलाने वाले पंजाब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चण्डीगढ़ पर उसका प्रशासनिक नियंत्रण समाप्त करने की किसी भी पहल का पुरजोर विरोध करेगा।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सहित राज्य के प्रमुख नेताओं ने कहा है कि चण्डीगढ़ पर अपने दावे से पंजाब प्रांत एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। ये नेता चण्डीगढ़ पर पंजाब के राज्यपाल का प्रशासनिक नियंत्रण समाप्त करने की केंद्र सरकार की पहल पर कड़ी आपत्ति जता रहे हैं। केंद्र सरकार चण्डीगढ़ पर राज्यपाल का नियंत्रण समाप्त कर इसे एक मुख्य आयुक्त के नियंत्रण के तहत लाने की पूर्ववर्ती व्यवस्था को कायम करना चाहती है।
मुख्यमंत्री बादल ने कहा, "हम केंद्र सरकार को चण्डीगढ़ पर पंजाब का नियंत्रण समाप्त करने नहीं देंगे।" पंजाब को 1988 में चण्डीगढ़ की प्रशासनिक जिम्मेवारी तब सौंपी गई थी, जब सिख आतंकवाद चरम पर था और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
पंजाब के राज्यपाल एस.एफ रॉड्रिग्स के कार्यालय के कई विवादों, संदिग्ध भूमि सौदों में फंसने एवं शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों में टकराव के कारण चण्डीगढ़ को पंजाब के राज्यपाल के नियंत्रण से मुक्त करने की पहल शुरू हुई।
केंद्र सरकार प्रशासनिक अधिकारियों से रॉड्रिग्स के टकराव और कई विवादों में रॉड्रिग्स के फंसे होने से चिंतित है। उनका यहां से सांसद एवं कें द्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल से भी अच्छा रिश्ता नहीं है। बंसल कहते हैं, "पंजाब को चण्डीगढ़ की प्रशासनिक जिम्मेवारी एक खास कारण से सौंपी गई थी। अब केंद्र सरकार इसकी समीक्षा कर रही है।"
1966 में पंजाब के पुनर्गठन के दौरान यह वादा किया गया था कि चण्डीगढ़ को सिर्फ पंजाब की राजधानी बना दिया जाएगा। इधर, इस सियासी जंग में हरियाणा भी कूद गया है। हरियाणा चाहता है कि चंडीगढ़ पर बारी-बारी से दोनों राज्यों का नियंत्रण होना चाहिए, न कि सिर्फ पंजाब का।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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