नेपाल में 'मुंबइया' नाम से जाना जाता है एड्स

काठमांडू, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। पूरी दुनिया में अपने पैर पसार चुकी घातक बीमारी एड्स को नेपाल में 'मुंबइया' नाम से जाना जाता है। नेपाल में काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था-'इक्वल एक्सेस' ने भारत में काम करने वाले नेपाली प्रवासियों के लिए जब एक रेडियो कार्यक्रम की शुरुआत की, तब इस बात का खुलासा हुआ।

'इक्वल एक्सेस' ने अपने रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से पूर्वी नेपाल की एक 13 साल की किशोरी की ह्दयविरादक कहानी प्रसारित की। इस किशोरी को उसके पिता ने मुंबई से आए दो दलालों के हाथों बेच दिया था।

उन दलालों ने उसे मुंबई के चकलाघरों तक पहुंचा दिया और वहीं उसे एड्स हुआ। इस किशोरी ने अपने चार साल के प्रवास के दौरान अनेक तरह की यातनाएं झेलीं और जब वह मौत के कगार पर पहुंच गई, तब उसे स्वदेश लौटने की इजाजत दे दी गई। नेपाल में उसे लोग 'मुंबइया' नाम से जानते थे लेकिन अब उसकी मौत हो चुकी है।

अगस्त 2005 में अपनी मौत के वक्त वह मात्र 19 वर्ष की थी। स्वदेश लौटने के बाद उसने अपने मित्रों से बताया था कि वह क्या चीज है जो उसे तिल-तिल कर मार रही है।

अपनी मौत से एक वर्ष पहले दिए गए साक्षात्कार में उस युवती ने कहा था, "मैं अंग्रेजी बोलना नहीं जानती हूं। मैं एक वेश्या हूं। मुंबइया शब्द उन लड़कियों के लिए उपयोग में लाया जाता है, जो भारत में देह व्यापार करती हैं।"

नेपाल के हजारों लड़के और लड़कियां भारत के चकलाघरों में काम करते हैं। आमतौर पर उन्हें उनके परिजन दलालों को बेच देते हैं। मुंबई पहुंचकर ये बच्चे शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार बनते हैं और एक दिन एड्स से पीड़ित होकर घर लौटते हैं।

उनके स्वदेश लौटने से नेपाल में भी यह रोग बड़ी तेजी से पैर पसार रहा है। नेपाल में इस समय 14,000 ऐसे लोग हैं, जिनके एड्स से पीड़ित होने की पुष्टि हो चुकी है। राष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक इससे संक्रमित लोगों के लोगों की कुल संख्या 70 हजार के ऊपर हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र से मिली जानकारी के मुताबिक भारत के चकलाघरों में नेपाल की 160,000 लड़कियां रहती हैं। इनमें से आधी लड़कियों को एड्स से पीड़ित होने के बाद स्वदेश लौटने की इजाजत मिल जाती है। भारत और नेपाल के बीच आवाजाही के लिए वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती, लिहाजा इन्हें स्वदेश लौटने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती।

अमेरिकी गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक भारत के चकलाघर नेपाली लड़कियों के खरीद-फरोख्त के सबसे बड़े केंद्र बन चुके हैं। यहां हर वर्ष करीब 10 से 15 हजार नेपाली लड़कियों और औरतों को खरीदा और बेचा जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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