पश्चिम बंगाल सरकार के साथ टकराव नहीं : केंद्र

P Chidambaram
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजे गए केंद्रीय दल को लेकर उठे विवाद पर केंद्र सरकार ने कहा है कि इस फैसले का उद्देश्य राज्य के साथ सहयोग करना है। इसे राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की पृष्ठभूमि में नहीं देखा जाना चाहिए।

संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने राज्य में धारा 356 लागू किए जाने की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का मकसद कानून-व्यवस्था के मसले पर राज्य सरकार के साथ सहयोग करना है।

लोकसभा में शून्य काल के दौरान इस मसले पर संक्षिप्त बहस के दौरान उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य है राज्य के साथ सहयोग करना। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में 18 जून से ही राजनीतिक संघर्ष जारी है। हम इसे लेकर चिंतित हैं। हम चाहते हैं कि वहां अंतर-दलीय संघर्ष समाप्त हो।"

राज्‍य के अधिकारियों से करेगा चर्चा

राज्य के मुख्यमंत्री के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने वाले चिदंबरम ने जोर देकर कहा कि यह अध्ययन दल राज्य के अधिकारियों से कानून व्यवस्था पर बातचीत कर महौल में सुधार के उपाय ढूंढ़ने में मदद देगा। उन्होंने कहा, "मैं मुख्यमंत्री से इस मसले पर संपर्क में हूं और मैंने उन्हें यही बताया है कि अध्ययन दल भेजे जाने के निर्णय से राज्य प्रशासन लाभान्वित होगा।"

गृहमंत्री ने कहा, "हम महसूस करते हैं कि इस मोच्रे पर केंद्र एवं राज्य सरकार को मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र और राज्य के बीच टकराव का सवाल ही नहीं उठता। अध्ययन दल भेजे जाने का फैसला राज्य की कानून व्यवस्था के प्रति केंद्र की गंभीरता और राज्य के साथ इस मसले पर सहयोग की पुष्टि करता है। यह दल राज्य सरकार से सौहार्दपूर्ण बातचीत करेगा।" इससे पहले केंद्रीय दल भेजे जाने के मुद्दे पर हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

सदन की कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद ही हंगामा आरंभ हो गया। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सीताराम येचुरी ने सरकार के इस कदम को संविधान का उल्लंघन बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि वह पार्टी की भावनाओं से गृहमंत्री को अवगत कराकर इस पर एक बयान देने के लिए कहेंगे।

इस जवाब से अंसतुष्ट वामदलों के सदस्य सभापति हामिद अंसारी के आसन के सामने पहुंच गए। इससे बाध्य होकर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही दोबारा आरंभ होने पर भी हंगामा समाप्त नहीं हुआ और सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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