अरब देशों में सप्लाई होती थीं भारतीय लड़कियां

जांच दल अक्टूबर में गहन जांच-पड़ताल के दौरान एक ऐसे माफिया तक पहुंचने में सफल रहा जो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाओं एवं लड़कियों का अपहरण कर उन्हें वेश्यावृति के लिए बाध्य करता रहा है। कई बार इन महिलाओं का इस्तेमाल मानव अंगों के धंधे में किया जाता था। अंतत: 15 से 30 उम्र वर्ग की इन लड़कियों को मध्य पूर्व देशों में देह व्यापार के लिए भेज दिया जाता था। इसके लिए नेपाल का इस्तेमाल पारगमन क्षेत्र के तौर पर किया जाता रहा है।
आयोग ने अहिरोला गांव की एक 18 वर्षीया युवती की शिकायत पर पूरे मामले की तहकीकात के लिए जांच दल का गठन किया था। इस दल में स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। आयोग सदस्य वासुंक सिएम के नेतृत्व में इस दल ने पूरे रैकेट की पड़ताल की।
नेता और कई अधिकारी भी शामिल
वांसुक ने कहा, "इस कालेज छात्रा का दो लोगों ने सिंतबर में अपहरण कर लिया। वे उसे बाइक पर जबरन बिठा कर ले गए। उसे एक सुनसान जगह में ले जाकर क्लोरोफॉर्म सुंधाकर बेहोश कर दिया गया। लड़की को अक्सर बेहोश रखा जाता था।" लड़की को उसके भाई ने गांववालों की मदद से मुक्त कराया। वह कहती हैं, "लड़की को कुछ भी याद नहीं है, पर मेडिकल जांच से उसके साथ सामूहिक बलात्कार की पुष्टि हुई है। लड़की ने बताया कि जिस इमारत में उसे रखा गया था, वहां पहले से करीब 15 लड़कियां कैद थीं।"
भाई की मदद से अपहर्ताओं के चंगुल से आजाद होने के दिन उसने कई लड़कियों को गाड़ियों में जबरन बिठाकर अज्ञात स्थानों की ओर ले जाते देखा। जांच से पता चला कि लड़कियों को पहले मुंबई ले जाया गया और फिर नेपाल के रास्ते उन्हें खाड़ी देशों में भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि इस धंधे में एक नेता और कई अधिकारी भी शामिल थे। वह कहती हैं, "जो नेता इसमें शामिल था वह सत्तारूढ़ दल का है और विधान सभा चुनाव भी लड़ चुका है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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