बकरीद से पूर्व भेड़-बकरों से सजे घाटी के बाजार

शहर के हाइडरपोरा क्षेत्र के रहने वाले 45 वर्षीय सोनौल्लाह डार ने कहा, "बकरीद के मौके पर पशु बिक्रेता मनमानी कीमत मांग रहे हैं। बाजारों में पशुओं की कोई कीमत तय नहीं है। हमने 18,000 रुपये में दो दुंबों की खरीद की है। वहीं कुछ दौलतमंद लोग एक-एक दुंबा 12,000 रुपये में खरीद रहे हैं।"
काबू में नहीं बकरों की कीमतें
पुराने शहर क्षेत्र के ईदगाह मैदान में जानवरों की खरीद-बिक्री के लिए बाजार लगे हुए हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों से पशु व्यापारी अपने जानवरों को बचने के लिए यहां आए हुए हैं।
व्यापारी नसरूल्लाह खताना (57) ने कहा, "मैं जम्मू क्षेत्र के राजौरी जिले से आया हूं। मुझे भेड़-बकरों को ट्रक में भरकर लाना पड़ा।"
गौरतलब है कि दुनिया भर के मुसलमान ईद-उल-जुहा पर्व के मौके पर पशु बलि देने की सदियों पुरानी परंपरा मनाते आ रहे हैं। देश के इस मुस्लिम बहुल राज्य में यह पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। एक सरकारी कर्मचारी बशीर अहमद (36) ने कहा, "प्रशासन के पास पशुओं की कीमतों पर काबू पाने की कोई व्यवस्था नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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