मूंगा चट्टानों के संरक्षण की नई योजना

दुनिया में मूंगा चट्टानों को बचाने की कोशिशें इतनी धूमिल पड़ गई हैं कि अब ये योजना बनाई जा रही है कि भविष्य में उन्हें संरक्षित रखने के लिए नमूनों को फ्रीज़ (जमाकर) करके रखा जाए.
डेनमार्क में हुई एक बैठक में शोधकर्ताओं के उन साक्ष्यों पर चर्चा हुई कि मूंगे की बहुत सी प्रजातियां ऐसी हैं जिनका बचना मुश्किल है.
शोध के अनुसार अगर हरित गैसों के उत्सर्जन पर कठोर नियमों का पालन किया जाए तो भी मूंगे की कुछ प्रजातियां नहीं बचेंगी. इसीलिए वैज्ञानिकों ने मूंगे की कुछ प्रजातियों के नमूनों को द्रव नाइट्रोजन में संरक्षित करने का सुझाव दिया है. ऐसा करने से इन प्रजातियों को वैश्विक तापमान स्थिर रहने की स्थिति में भविष्य में दोबारा समुद्र में छोड़ा जा सकता है.
लंदन की ज़ूलोजिकल सोसाइटी के वैज्ञानिक साइमन हार्डिंग ने कहा, 'ये जैव-विविधता को बचाने का बेहतर तरीक़ा है और इस तरह की कोशिशों से मूंगों को दोबारा तैयार किया जा सकता है."
डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगेन में इस समय जलवायु परिवर्तन को लेकर सोलह बड़े देशों के सांसदों की बैठक चल रही है. बैठक का आयोजन 'ग्लोबल लेजिस्लेटर्स ऑर्गेनाइजेशन फॉर ए बैलेंस्ड एनवॉयरनमेंट" यानी 'ग्लोब" ने किया है.
इस बैठक में जिन तमाम मुद्दों पर चर्चा हो रही है उनमें एक ये भी है कि मूंगा चट्टानों को बचाने के लिए क्या करना है. मूंगा दुनिया भर में क़रीब पांच सौ करोड़ लोगों के भोजन और आय का प्रमुख स्रोत होने के साथ ही समुद्र तट की सुरक्षा का भी प्रमुख साधन है.
इस बैठक में नेताओं और वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया कि दुनिया भर में कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन इस क़दर बढ़ रहा है कि मूंगे को बचाने की लड़ाई हम हार रहे हैं.
आधुनिक शोध के अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया स्थित मूंगा त्रिकोण जो कि दुनिया भर में मूंगा चट्टानों का सबसे घना क्षेत्र है, जलवायु परिवर्तन की वजह से इस शताब्दी के अंत तक नष्ट हो सकता है. खाद्य सुरक्षा और लोगों के जीवन यापन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा.












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