'नक्सलियों को पड़ोसी देशों से मिल रहे हैं हथियार'

चिदंबरम ने कहा कि इस इस बात में संदेह नहीं है कि भारत में नक्सली वारदातों को अंजाम देने के लिए पड़ोसी देश माओवादियों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर नक्सली हिंसा छोड़ने को तैयार होते हैं तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है। भारत के लिए नक्सली सबसे बड़े आंतरिक खतरा बन चुके हैं। सरकार जानती है कि नक्सली कभी भी हथियार नहीं डालेंगे, उन्हें दुख है कि कुछ लोग अब भी नक्सलियों को आंदोलनकारी कहते हैं।
हालांकि चिदंबरम ने माओवादियों को देश के बाहर से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता मिलने की बात से इंकार किया है। यह पूछे जाने पर कि हथियारों की सप्लाई में क्या पाकिस्तान का हाथ है, चिदंबरम ने कहा कि फिलहाल इस बात के सबूत नहीं मिले हैं। जब्त किए गए हथियारों पर पाकिस्तान का कोई निशान नहीं मिला है। इसलिए सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया जा सकता।












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