बीटी बैगन खाने को तैयार हो जाइये

जीईएसी ने बीटी बैगन को मंजूरी देते हुए गेंद सरकार के पाले में डाल दी है। कमेटी ने कहा है कि अब सरकार ही तय करेगी कि बीटी बैगन की व्यवसायिक खेती हो या नहीं। मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए इस बड़े खतरे का विरोध कई स्वयं सेवी संस्थाएं कर रही हैं। अब देखना यह है कि सरकार किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
क्या हैं जेनेटिकली मॉडीफाइड सब्जियां
जेनेटिकली मॉडीफाइड यानी अनुवांशिक रूप से तराशी गईं सब्जियां वे सब्जियां हैं, जिनकी कोशिकाओं में कृत्रिम रूप से अनुवांशिक छेड़छाड़ की गई हो। इनकी पैदावार कम लागत में जल्दी हो जाती है। इससे बाजार में जरूरत से अधिक मात्रा में सब्जियां लायी जा सकती हैं। ये दाम में जरूर कम होती हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानीकारक हैं।
चूहों व बंदरों पर किए गए प्रयोगों में बीटी सब्जियों के कई नकारात्मक असर देखे गए हैं। जैसे मनुष्यों के रक्त में लाल कोशिकाओं का घट जाना, किडनी या हार्ट में इंफेक्शन हो जाना, आदि। यही नहीं ऐसी सब्जियों की पैदावार से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसमें मौजूद टॉक्सिन जीन के फैलने से साधारण पेड़ पौधों के फलों की पैदावार को भी नुकसान पहुंचता है। वही दूसरा पक्ष कहता है कि यह फसल कीट प्रतिरोधक होती है इसलिए कीटनाशक का छिड़काव कम होता है और इससे यह अधिक स्वास्थ्यवर्धक होती है।












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