कोर्ट से राजनीति न करें माया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीधे मायावती की ओर इशारा करते हुए कहा कि स्मारकों के निर्माण पर रोक के बावजूद कार्य जारी होने से साफ लगता है कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन उच्चस्थ पद पर आसीन किसी व्यक्ति के इशारे पर किया जा रहा है।
मंगलवार को जस्टिस बीएन अग्रवाल तथा आफताब आलम की पीठ ने मामले की सुवाई के दौरान सरकारी वकील हरीश साल्वे से कहा, "आप हमें बताएं कि किसने कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करने का निर्देश्ा दिया। जाहिर है किसी उच्चपदस्थ अधिकारी ने ही निर्माण कार्य जारी रखने के निर्देश दिए होंगे।"
याद रहे संविधान सबसे ऊपर है
इस दौरान जब यूपी सरकार के वकील ने अदालत के निर्देश का उल्लंघन नहीं होने की दलील दी, तो कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार के हलफनामे में सच्चाई का अभाव है। यह महज बहानेबाजी है। यदि किसी प्रकार का भ्रम है, तो राज्य सरकार इसका स्पष्टीकरण दे। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र और अल्पमत एक साथ नहीं रह सकते क्योंकि संविधान सवरेपरि है और अदालती आदेश का पालन किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि मायावती के ढाई हजार करोड़ के ड्रीम पोजेक्ट जिसमें बसपा संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम, मायावती और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियां लगाई जानी हैं। ढाई हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। कोर्ट की रोक के बावजूद लखनऊ के अम्बेडकर स्थल पर काम जारी था, जिस पर कोर्ट ने मायावती सरकार के खिलाफ कराड़ रुख अपनाया। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्तूबर को होगी।













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