बाल्को संयंत्र में चिमनी गिरी, 20 मरे

राज्य सरकार ने इस दुर्घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 100,000 रुपये मुआवजा देने की भी घोषणा की है। यह दुर्घटना उस समय घटी जब लगभग 100 श्रमिक और इंजीनियर बाल्को नगर इलाके में संयंत्र के निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।
50 से अधिक श्रमिक मलबे में फंसे
जिला पुलिस अधीक्षक रतनलाल डांगी ने बताया, "यह एक बड़ी दुर्घटना है, जिसमें 20 श्रमिक मारे गए हैं। मलबे में फंसे लगभग 50 श्रमिकों व इंजीनियरों को बचाने के लिए हमने राहत व बचाव अभियान शुरू कर दिया है।"
बाल्को के अधिकारियों ने कहा कि 275 मीटर की चिमनी का निर्माण किया जा रहा था जिसमें से 100 मीटर का काम पूरा हो चुका था। भारी बारिश की वजह से चिमनी का ढांचा ध्वस्त हो गया। मलबे में दबे लोगों की तालाश जारी है। कोरबा के जिलाधिकारी अशोक अग्रवाल ने कहा,"हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। मलबे के नीचे अभी भी लगभग 50 मजदूरों के दबे होने की आशंका है।"
जीडीसीएल को जिम्मेदार ठहराया
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गुस्साए कामगारों ने गेन्नोन डंकरली एंड कंपनी लि. (जीडीसीएल) को इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया है। चिमनी निर्माण का कार्य इसी कंपनी को सौंपा गया था। बाल्को यहां 600 मेगावाट क्षमता के दो ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण कर रही है जिसमें स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (इंडिया) की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत है जबकि 49 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत सरकार की है।
राज्य सरकार ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी करने लिए बाल्को प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है और दुर्घटना की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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