ब्रिटिशकालीन कब्रिस्तानों का गौरवशाली अतीत लौटाया जाएगा
विशाल गुलाटी
शिमला, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। धूल-धूसरित स्मृति लेख, क्षतिग्रस्त समाधि-प्रस्तर और काई की मोटी परत के नीचे पहचान खो रहीं कब्रें - यही हैं राज्य में ब्रिटिशकालीन कब्रिस्तानों की दास्तान। अब राज्य सरकारों ने इन कब्रिस्तानों का गौरवशाली अतीत लौटाने की योजना बनाई है।
राज्य के शिमला, धर्मशाला, कसौली, डलहौजी, धरमपुर, डगशाई और सुबाथु जैसे इलाकों में हजारों ब्रिटिशकालीन कब्रें हैं। अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात ये इलाके ब्रिटिश काल में अंग्रेजों की प्रमुख बस्तियां हुआ करते थे। सरकार का मानना है कि इन कब्रिस्तानों का जीर्णोद्धार कराकर न सिर्फ उनका गौरवशाली अतीत लौटाया जा सकता है, बल्कि इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य की प्रधान पर्यटन सचिव मनीषा नंदा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "हमने इन कब्रिस्तानों का खोया हुआ अतीत लौटाने की योजना बनाई है। अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए आने वाले मेहमानों की शिकायत रही है कि इन कब्रों की हालत जर्जर होती जा रही है।" उन्होंने बताया कि यहां तक कि लंदन का ब्रिटिश एसोसिएशन फॉर सिमेटरीज इन साउथ एशिया(बीएसीएस) भी इसे लेकर चिंता जता चुका है।
उन्होंने कहा, "यहां के कब्रिस्तान वास्तु कला के भी उत्कृष्ट नमूने हैं। कब्रों के निर्माण में वास्तुकला की बारीकियों का पर्याप्त ख्याल रखा गया। ऐसे में इनका पर्यटन के लिहाज से भी खास महत्व है।" राज्य में 23 प्रमुख ब्रिटिशकालीन कब्रिस्तान हैं। इनके अलावा कई छोटे कब्रिस्तान भी हैं। शिमला में पांच कब्रिस्तान हैं। कुछ कब्रिस्तान तो दो सदी से भी ज्यादा पुराने हैं।
कब्रिस्तानों की हालत देखकर माइक ब्रुस जैसे ब्रिटिश पर्यटक दुखी हैं। वह कहते हैं, "स्थिति वाकई निराशाजनक है। कई कब्रों का अस्तित्व मिट चुका है। कई की हालत जर्जर है।" नामी ब्रिटिश अधिकारियों एवं प्रशासकों की कब्रों की मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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