कमजोर प्राणियों का शिकार करने वाला डरपोक शिकारी था टायरेनोसॉरस-रेक्स
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार जर्मन वैज्ञानिकों की एक टीम ने डायनासोर की इस प्रजाति के जीवाश्मों पर गहन शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। म्यूनिख के रुडविग मैक्सीमिलियन्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ओलीवर रॉहुट के नेतृत्व में हुए इस शोध से पता चलता है कि टी-रेक्स इतने डरपोक और काहिल थे कि उपयुक्त शिकार नहीं मिलने पर संभवत: अपने बच्चों को ही निगल जाते थे।
शोधकर्ताओं के मुताबिक टी-रेक्स मुख्य रूप से नाजुक और असहाय शाकाहारी प्राणियों का शिकार किया करते थे। ऐसे प्राणी टी-रेक्स से काफी छोटे होते थे। रॉहुट कहते हैं, "टी-रेक्स शायद ही दूसरे परभक्षियों के लिए खतरा थे। दरअसल, वे खुद ऐसे प्राणियों से बचते थे। फिल्मों ने इस प्रजाति का बेवजह महिमामंडन कर दिया है।"
टी-रेक्स से जुड़ी धारणा को फंतासी और मिथ का मिश्रण करार देते हुए रॉहुट ने कहा, "टी-रेक्स के पेट वाले हिस्से के जीवाश्म में नाजुक व कमजोर प्राणियों के जीवाश्म धंसे मिले हैं। कुछ मामलों में तो वे इतने छोटे प्राणी का शिकार करते थे जिन्हें आसानी से एक ही बार में निगला जा सकता था। टी-रेक्स ऐसे प्राणियों का शिकार किया करते थे जो कम से कम प्रतिरोध करे और उन्हें नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं हो।"
उल्लेखनीय है कि रोमांचक फिल्मों में इस प्राणी को 'मौत की मशीन' करार दिया जाता रहा है। ऐसी भी संभावना है कि इस प्रजाति के प्राणी किशोरावस्था में परभक्षियों का निशाना बनते रहते होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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