मंडी, हमीरपुर संसदीय क्षेत्रों पर होंगी सबकी निगाहें

विशाल गुलाटी

शिमला, 12 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के चार संसदीय क्षेत्रों में बुधवार को होने वाले के मतदान में सभी की निगाहें मंडी और हमीरपुर निर्वाचन क्षेत्रों पर लगी होंगी।

मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र जहां हमीरपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार हैं, वहीं कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को मंडी से उतारा है।

पांच बार राज्य के मुख्मंत्री रहे वीरभद्र सिंह (74 वर्ष)जहां इस बार अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं वहीं भाजपा से बगावत करके कांग्रेस उम्मीदवार बने नरेंद्र ठाकुर के खिलाफ धूमल की प्रतिष्ठा दांव पर है।

इन दोनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में शिमला (सुरक्षित) और कांगड़ा की तुलना में काफी अक्रामक प्रचार अभियान चलाया गया है।

'राजा साहब' के नाम से प्रसिद्ध वीरभद्र सिंह 29 वर्ष बाद संसदीय चुनाव में उम्मीदवार बने हैं। इससे मतदाताओं में एक अजीब उलझन है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद इस बार वीरभद्र सिंह को अपनी करिश्माई नेता की छवि को फिर बहाल करना है। सत्ता से हटने के बाद वीरभद्र सिंह राज्य राजनीति में करीब-करीब उपेक्षित ही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वीरभद्र सिंह की जीत से न केवल उनके राजनीतिक जीवन को नई ऊर्जा मिलेगी वरन यह राज्य में कांग्रेस की ताकत लौटने का भी संकेत होगा। उनका मुकाबला भाजपा के तीन बार के सांसद महेश्वर सिंह से है,जिनको वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने वर्ष 2004 के चुनाव में 66,566 वोटों से पराजित किया था।

मंडी संसदीय क्षेत्र पूर्व राजपरिवारों के सदस्यों के लिए सुरक्षित स्थान रहा है। पिछले 14 लोकसभा चुनावों में यहां से 10 बार राजपरिवारों के सदस्य विजयी रहे हैं। इस बार भी मुकाबला राजपरिवारों के दो सदस्यों के बीच ही है।

वीरभद्र सिंह जहां बुशेहर के पूर्व राजघराने से हैं वहीं महेश्वर सिंह कुल्लू के पूर्व राजपरिवार के वंशज हैं।

लोगों की निगाहें हमीरपुर संसदीय क्षेत्र पर भी लगी हैं जहां धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर भाजपा उम्मीदवार हैं। पिछली मई में हुए उपचुनाव में अनुराग इस क्षेत्र से 180,000 के भारी अंतर से विजयी हुए थे।

धूमल इस क्षेत्र में भाजपा के विद्रोही और कांग्रेस उम्मीदवार नरेंद्र ठाकुर के खिलाफ अपने बेटे की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रचार कर रहे हैं। नरेंद्र ठाकुर ने वंशवादी राजनीति के खिलाफ अपनी लड़ाई छेड़ी है।

नरेंद्र मतदाताओं को यह भी नहीं बताना भूल रहे हैं कि 10 वर्ष पहले धमूल परिवार के पास हजारों की संपत्ति थी और अब उनके पास करोड़ों की जायदाद है।

कांग्रेस ने शिमला और कांगड़ा से वर्तमान सांसद धनीराम शांडिल तथा चंदर कुमार को उम्मीदवार बनाया है। इनके खिलाफ भाजपा ने वीरेंद्र कश्यप और राजन सुशांत को प्रत्याशी बनाया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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