खत्म होने की कगार पर है सुभिक्षा की संचित नकदी
चेन्नई, 5 फरवरी (आईएएनएस)। खुदरा स्टोरों की श्रृंखला चलाने वाली सुभिक्षा ट्रेडिंग सर्विसिज का कहना है कि उसकी संचित नकदी खत्म होने की कगार पर है।
कुल 23.05 अरब रुपये की परिसंपत्तियों वाली यह कंपनी मुख्यत: खाद्यान्न, मोबाइल फोन, दवाइयों, फलों और सब्जियों की खुदरा बिक्री के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी का मानना है कि तीन अरब रुपये की आर्थिक सहायता उसे वापस पटरी पर लाने में सहायक सिद्ध होगी।
सुभिक्षा के प्रबंध निदेशक आर. सुब्रमण्यम ने आईएएनएस को बताया, "हमने शेयरों के माध्यम से अधिक धन नहीं उगाहा और हमें उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।"
उन्होंने कहा, " यह बिजनेस मॉडल की समस्या न होकर पूंजीगत ढांचे की समस्या थी। आखिर वाल-मार्ट से लेकर पैंटालून तक सभी कंपनियां यही मॉडल अपना रही हैं। दरअसल हम शेयरों से पर्याप्त धन एकत्र करने में असफल रहे।"
सुब्रमण्यम ने माना कि वर्तमान में कंपनी पर 7.5 अरब रुपये का कर्ज है जिसका मासिक ब्याज नौ करोड़ रुपये होता है।
सितम्बर 2006 में 150 आउटलेट्स से कंपनी गत सितम्बर में 1,655 आउटलेट्स तक पहुंची लेकिन यह सारा विस्तार ऋण के सहारे किया गया। अब जबकि बैंकों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं कंपनी के सामने समस्या खड़ी हो गई है। सुभिक्षा ने अपने 90 आउटलेट बंद कर दिए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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