मुल्लइतिवु में त्रासदी का गवाह है एक तमिल नागरिक
नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका में सेना की कार्रवाई के दौरान तमिल नागरिकों पर किस कदर कहर बरप रहा है इसकी प्रत्यक्ष गवाही एक वृद्ध तमिल नागरिक सहमे हुए देता है।
इस व्यक्ति ने कोलंबो से फोन पर आईएएनएस को बताया, "उत्तरी श्रीलंका में सेना की कार्रवाई के दौरान पुरुषों, महिलाओं और बच्चों में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के कब्जे वाले क्षेत्र से भागने के लिए अफरा-तफरी मची हुई। यह पता नहीं कि श्रीलंकाई सरकार इन लोगों तक कैसे पहुंचेगी।"
मुल्लइतिवु से भागकर कोलंबो पहुंचा यह व्यक्ति अपना नाम नहीं बताना चाहता। इसका कहना है कि ऐसा करने पर उसे गंभीर खतरा हो सकता है। यह उम्र के 50वें पड़ाव को पार कर चुका है।
इस व्यक्ति ने आईएएनएस को बताया कि वह मुल्लइतिवु जिले के उदयारकट्ट में हुई भीषण बमबारी का गवाह है। इस इलाके में ही तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच लड़ाई चल रही है।
व्यक्ति ने बताया, "26 जनवरी की दोपहर आम लोगों पर बमबारी होने लगी। इसके बाद सभी इधर-उधर भागने लगे। मैंने देखा कि एक अपंग आदमी भी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। किसी को यह पता नहीं था कि कौन सी जगह सुरक्षित है। हर जगह भगदड़ मची थी।"
उसने बताया, "लोग दर्द और आतंक के माहौल में चीख रहे थे। मैंने देखा कि सड़कों पर क्षत-विक्षत शव बिखरे पड़े थे। कई घायल मदद की गुहार लगा रहे थे लेकिन हम कुछ नहीं कर सकते थे।"
इस व्यक्ति ने बताया कि 26 जनवरी से शुरू हुई बमबारी तीन दिनों तक जारी रही। इसमें कम से कम 20 लोग मारे गए थे। इस क्षेत्र में लिट्टे का दफ्तर था लेकिन उस पर बमबारी नहीं हो रही थी।
उसके मुताबिक मुल्लइतिवु में अभी भी ज्यादातर लोग तमिल विद्रोहियों के साथ फंसे हुए हैं और भय की जिंदगी जीने का विवश हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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