प्रचंड के दहेज विरोधी फरमान के बावजूद जारी है यह कुप्रथा
काठमांडू, 2 फरवरी (आईएएनएस)। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने राजशाही के खिलाफ लड़ाई भले ही जीत ली हो लेकिन नेपाली समाज में जारी कुप्रथाओं से निपटना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
प्रचंड ने पिछले सप्ताह दहेज और छुआछूत पर पाबंदी लगाने की बात कही थी। गत 25 जनवरी को उन्होंने ऐलान किया था कि नेपाल में शादी के लिए दहेज लेने व देने की कुप्रथा पर एक सप्ताह के अंदर रोक लगा दी जाएगी।
नेपाल के सरकारी मीडिया ने सोमवार को खबर दी है कि तराई जिले सुनसरी के गौतमपुर गांव में आर्य प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक बिशुदयाल मेहता ने एक मोटरसाइकिल की मांग करते हुए अपनी पत्नी रामवती को उसके मायके पहुंचा दिया। अहम बात यह है कि प्रधानाध्यापक को ग्राम समिति का भी पूरा समर्थन मिला।
उधर, संखुवासभा जिले के खांदबारी गांव में जातिगत आधार पर छुआछूत का मामला प्रकाश में आया है। इस गांव में दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों व दूसरों के घरों में जाने और गांव के तालाब से पानी लेने की मनाही है।
इस गांव के निवासी धन बहादुर खनाल की पत्नी का एक सप्ताह पहले निधन हुआ था लेकिन गांव के स्वर्ण वर्ग से ताल्लुक रखने वाले पंडित ने अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक प्रक्रियाओं को करने से इंकार कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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