'मुंबई हमले सिर्फ़ भारत की समस्या नहीं'

'मुंबई हमले सिर्फ़ भारत की समस्या नहीं'

अमरीकी सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी समिति के समक्ष 'मुंबई हमलों से मिले सबक' विषय पर ये विचार कार्नेगी एंडावमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस के एशली टेलिस ने व्यक्त किए हैं. कुछ अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार समिति के सामने रखे हैं.

भारत एक स्पंज बन गया है जो हम सभी (अमरीकियों और अन्य लोगों) की बचा रहा है. पाकिस्तान का पड़ोसी होने के नाते....नई दिल्ली आतंकवादी गुटों के अधिकतर हमलों को बर्दाश्त करता है. ये आतंकवादी गुट इसराइल, अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भारत को भी दुश्मन मानते हैं एशली टेलिस का बयान

भारत एक स्पंज बन गया है जो हम सभी (अमरीकियों और अन्य लोगों) की बचा रहा है. पाकिस्तान का पड़ोसी होने के नाते....नई दिल्ली आतंकवादी गुटों के अधिकतर हमलों को बर्दाश्त करता है. ये आतंकवादी गुट इसराइल, अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भारत को भी दुश्मन मानते हैं

सीनेट समिति के सामने 'आतंकवाद' पर ग़ैर-सरकारी विशेषज्ञों के बयान सुने गए हैं. इससे पहले गत आठ जनवरी को इसी विषय पर समिति की सुनवाई में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग, ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई और न्यूयॉर्क पुलिस के बयान सुने गए थे.

समिति के चेयरमैन जोज़फ़ लाइबरमैन के अनुसार मुंबई हमलों से संबंधित मुद्दों, चरमपंथी संगठनों से पैदा हुए ख़तरों, लश्करे तैबा, हमलावरों की रणनीति और सॉफ़्ट टारगेट्स यानी आसान निशानों की सुरक्षा पर सुनवाई हो चुकी है.

उनके मुताबिक अब समिति का ध्यान इस विषय पर केंद्रित है कि अमरीका में सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से सॉफ़्ट टारगेट्स यानी आसान निशानों को कैसे बचाया जा सकता है.

'केवल भारत की समस्या नहीं'

भारत के नागरिकों को नाराज़गी है कि वह एक बहुत ही सॉफ़्ट स्टेट यानी आसान निशाना साबित हुआ है जो आतंकवादी घटनाओं को रोक नहीं पाया है और अपने आतंकवादी दुश्मनों या फिर पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ कारगर क़दम नहीं उठा पाया है एशली टेलिस का बयान

भारत के नागरिकों को नाराज़गी है कि वह एक बहुत ही सॉफ़्ट स्टेट यानी आसान निशाना साबित हुआ है जो आतंकवादी घटनाओं को रोक नहीं पाया है और अपने आतंकवादी दुश्मनों या फिर पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ कारगर क़दम नहीं उठा पाया है

कार्नेगी एंडावमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और एशिया रणनीति के विशेषज्ञ एशली टेलिस ने कहा, "भारत एक स्पंज बन गया है जो हम सभी (अमरीकियों और अन्य लोगों) की बचा रहा है. पाकिस्तान का पड़ोसी होने के नाते....नई दिल्ली आतंकवादी गुटों के अधिकतर हमलों को बर्दाश्त करता है. ये आतंकवादी गुट इसराइल, अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भारत को भी दुश्मन मानते हैं."

एशली टेलिस ने सीनेट समिति के सामने बयान में ये भी कहा, "भारत के नागरिकों को नाराज़गी है कि वह एक बहुत ही सॉफ़्ट स्टेट यानी आसान निशाना साबित हुआ है जो आतंकवादी घटनाओं को रोक नहीं पाया है और अपने आतंकवादी दुश्मनों या फिर पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ कारगर क़दम नहीं उठा पाया है."

उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित भारत की अनसुलझी समस्याओं का भी ज़िक्र किया है. लेकिन साथ ही ये भी कहा है कि 'ऐसा कोई आश्वासन नहीं है कि यदि ये समस्याएँ सुलझा ली जाती हैं तो भारत को या फिर पश्चिमी देशों को आतंकवाद के ख़तरे ख़त्म हो जाएँगे.'

यदि अमरीका ये नहीं समझता कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई साझा तौर पर लड़ी जानी चाहिए.....तो भारत की आने वाली सरकारें इस समस्या पर कार्रवाई के ऐसे विकल्प चुन सकती है जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा में कमी सकती है और पाकिस्तान में परिवर्तन लाने की अमरीकी कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं एशली टेलिस का बयान

यदि अमरीका ये नहीं समझता कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई साझा तौर पर लड़ी जानी चाहिए.....तो भारत की आने वाली सरकारें इस समस्या पर कार्रवाई के ऐसे विकल्प चुन सकती है जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा में कमी सकती है और पाकिस्तान में परिवर्तन लाने की अमरीकी कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं

उनका तर्क है, "इन हमलावरों का लक्ष्य कश्मीर से कहीं आगे जाता है. उनका मक़सद ग़ैर-पश्चिमी दुनिया में सबसे बढ़िया लोकतंत्र को नष्ट करना है. ये लोकतंत्र अत्यंत ग़रीबी, बहुसंस्कृति और स्वशासन के कुछ ही वर्षों के इतिहास के बावजूद फल-फूल रहे हैं."

एशली टेलिस ने चेताया है कि ताज़ा हमलों और भारत के सामने चरमपंथ के ख़तरे को केवल नई दिल्ली की समस्या समझना एक ग़लती होगी.

उनका कहना है, "यदि अमरीका ये नहीं समझता कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई साझा तौर पर लड़ी जानी चाहिए.....तो भारत की आने वाली सरकारें इस समस्या पर कार्रवाई के ऐसे विकल्प चुन सकती है जिनसे क्षेत्रीय सुरक्षा में कमी सकती है और पाकिस्तान में परिवर्तन लाने की अमरीकी कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं."

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