बिहार में अराजपत्रित कर्मचारियों की हड़ताल जारी

राज्यभर में हड़ताल के कारण सरकारी कामकाज अस्त-व्यस्त है। सरकार ने हड़ताल में शामिल सैकड़ों कर्मचारियों के खिलाफ सार्वजनिक सूचना के जरिए कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय कार्रवाई करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

राज्य में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों से एक निश्चित समय सीमा के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगा गया है। दी गई समय सीमा के अंदर जवाब नहीं देने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने तक की कारवाई की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सरकार के कामकाज पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ा है।

इधर, बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) के महामंत्री मंजुल कुमार दास ने कहा, "आज सारे हड़ताली कर्मचारियों ने दमन विरोधी दिवस मनाया। सरकार के बेरुखी के कारण हड़ताल इतनी लंबी खींच गई है। जब तक सरकार कर्मचारियों की मांगें नहीं मानती तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी।"

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एक फरवरी को सभी कर्मचारी संघों की बैठक होगी जिसमें हड़ताल को और प्रभावी बनाने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तो राज्य के राजनीतिक दलों का भी समर्थन हड़ताली कर्मचारियों को मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी महासंघों और राज्य सचिवालय संघ तथा शिक्षकों के सात संगठनों वाला बिहार राज्य प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षाकर्मी संयुक्त मोर्चा के लगभग तीन लाख कर्मचारी सात जनवरी से हड़ताल पर हैं। ये लोग छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की तर्ज पर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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