पेयजल संकट पर आडवाणी ने की विशेषज्ञों से मंत्रणा
उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में पेयजल संकट के निदान के लिए भारी संख्या में पैसे खर्च किए गए लेकिन इसके बावजूद यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है, खासकर गरीब व ग्रामीण भारत में। देश की 10 फीसदी जनता को अभी भी शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाता है और कहीं-कहीं तो लंबी दूरी तय कर लोगों को पीने का पानी लाना पड़ता है।
बैठक में हिस्सा लेने आए विशेषज्ञों ने कहा कि पेयजल संकट और शौच की समस्या को समाप्त करना है तो इसके लिए सरकार की सोच व उसके दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।
बैठक में आए विशेषज्ञों की आम राय यह थी कि सरकार को इस क्षेत्र की ओर जितना ध्यान देने चाहिए था वह उसने कभी नहंी दिया। जो निवेश हुए वह भी पर्याप्त नहीं थे। जल की उपलब्धता और जल प्रबंधन का बहुत बुरा हाल रहा है। इसलिए शहरों तक में भी पानी की समस्या का गहरा संकट पैदा हो गया है।
इस बैठक में प्रख्यात पर्यावरणविद आर. के पचौरी, सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट की अध्यक्ष सुनीता नारायण समेत देश के जाने माने पर्यावरणविदों, डाक्टरों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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