बिहार सरकार के मुआवजा देने से इंकार पर मानवाधिकार आयोग नाराज

मुठभेड़ की यह घटना पटना के पलियागंज पुलिस थाना क्षेत्र में 7 फरवरी 2003 को हुई थी। 17 मई 2007 को मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बिहार पुलिस के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उसने आत्मरक्षार्थ गोली चलाई थी।

बाद में बिहार सरकार की ओर से कहा गया कि पीड़ित के रिश्तेदार को एक लाख रुपये की राशि अदा कर दी गई है। बाकी एक लाख के भुगतान पर सरकार ने असमर्थता जाहिर कर दी। इसके लिए सरकार ने वित्तीय संकट की बात सामने रखी।

अगली सुनवाई के दौरान आयोग ने अपने सुझाव को फिर से दोहराया। आयोग ने राज्य सरकार से कहा कि वित्तीय संकट के कारण मुआवजा देने से इंकार नहीं किया जा सकता। 16 जुलाई 2008 को भेजे एक अन्य पत्र में बिहार सरकार ने आयोग से कहा कि बाकी एक लाख की राशि दे पाना उसके लिए संभव नहीं होगा।

5 जनवरी 2009 को आयोग ने एक आदेश पारित कर राज्य सरकार को बाकी पैसे का भुगतान करने के लिए कहा। इसके साथ ही आयोग ने भुगतान की गई राशि के सबूत के साथ इस आदेश की प्राप्ति के छह हफ्तों के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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