राजनीतिक दलों ने झारखंड में राष्ट्रपति शासन का स्वागत किया

राज्य में सोरेन सरकार के समय विपक्ष में रहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने हालांकि विधानसभा निलंबित रखने के फैसले पर नाखुशी जाहिर की है।

राजग के प्रमुख घटक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने आईएएनएस से कहा, "राष्ट्रपति शासन पहले ही लगा दिया जाना चाहिए था। विधानसभा को निलंबन में रखकर केंद्र सरकार प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दे रही है।"

उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा को भंग कर ताजा चुनाव कराने चाहिए।

दूसरी ओर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की प्रमुख घटक कांग्रेस की स्थानीय इकाई ने केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए राज्य के मौजूदा हालत के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष शिबू सोरेन को जिम्मेदार ठहराया है।

कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रवक्ता आलोक दुबे ने कहा, "केंद्र के समक्ष राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। सोरेन के हठधर्मी रवैये ने राज्य को वर्तमान स्थिति ढकेल दिया। राजनीतिक संकट सोरेन ने ही पैदा किया था।"

दूसरी ओर राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री और निर्दलीय विधायक स्टीफेन मरांडी ने भी सोरेन को निशाना बनाते हुए कहा, "परिवार के लिए सोरेन के अंधे प्रेम और राजनीतिक अदूरदर्शिता ने राज्य को वषों पीछे पहुंचा दिया है।"

उधर, झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सोरेन पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "केंद्रीय नेताओं के निर्देश के मुताबिक हमने अपना नेता चुना लेकिन संप्रग में शामिल दल उस पर एक राय बनाने में नाकाम रहे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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