बिहार में जारी है अराजपत्रित कर्मचारियों की हड़ताल
इसबीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नन्द किशोर यादव ने स्वास्थ्य विभाग के हड़ताली कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील करते हुए कहा है कि उनकी मांगों पर सरकार विचार कर रही है।
यादव ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि अगर स्वास्थ्यकर्मी काम पर नहीं लौटे तो सरकार ठेके पर नए स्वास्थ्यकर्मियों की बहाली करेगी। उन्होंने माना कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, "सरकार को कर्मचारियों को जो देना था वह दे चुकी है, फिर भी अगर कर्मचारियों को अपने वेतन में विसंगति नजर आती है तो इसके लिए सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो कर्मचारियों की समस्याएं सुन उनकी वेतन विसंगतियों को दूर करेगी। इसलिए कर्मचारियों की हड़ताल अनुचित है।"
मोदी ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा जितनी मांगें की जा रही हैं उन्हें पूरा करना सरकार के बूते से बाहर की बात है। उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों से राज्य के विकास के हित में काम पर लौटने की अपील की। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी को ही हड़ताल से संबंधित फैसला लेने की जिम्मेवारी सौंपी है।
बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह का दावा है कि राज्य के लगभग तीन लाख से ज्यादा कर्मचारी इस हड़ताल में भाग ले रहे हैं तथा राज्य के अधिकांश सरकारी कार्यालयों तथा अस्पतालों में कामकाज प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ सम्मानजनक समझौते के बाद ही कर्मचारी काम पर लौटेंगे।
उल्लेखनीय है कि छठे वेतनमान को केन्द्र सरकार की तर्ज पर लागू करने की मुख्य मांग को लेकर राज्य के अराजपत्रित कर्मचारी महासंघों और राज्य सचिवालय संघ के आह्वान पर सात जनवरी से राज्यभर के अधिकांश कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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