चीनी शिक्षकों को वीजा देने में उदार नहीं है भारत: चीनी राजनयिक

श्रेया बसु

कोलकाता, 14 जनवरी(जनवरी)। भारत में चीनी भाषा पढ़ने की ललक बढ़ती जा रही है, पर भारत सरकार चीनी शिक्षकों को वीजा देने में उदार नहीं है। चीनी शिक्षकों को वीजा जारी करने की प्रक्रिया बेहद सख्त और लंबी है। यह कहना है चीन के एक शीर्ष राजनयिक का।

कोलकाता में चीन के वाणिज्य महादूत माओ सिवेई ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, "भारत और चीन के बीच गहराते आर्थिक रिश्ते के कारण भारत में चीनी भाषा की मांग तेजी से बढ़ रही है, पर भारत में कोई चीनी शिक्षक चीनी पढ़ाने के लिए मौजूद नहीं है। इसकी वजह यह है कि यहां आने के लिए चीनी शिक्षकों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।"

उन्होंने कहा कि असली समस्या यह है कि इन शिक्षकों को आसानी से भारतीय वीजा नहीं मिल पाता। वह कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि भारत वीजा आवेदन खारिज कर देता है, पर वीजा जारी करने की प्रक्रिया इतनी लंबी, जटिल और उबाऊ है कि लोग थककर यह प्रयास छोड़ देते हैं।"

राजनयिक ने कहा कि जब से दोनों मुल्कों के बीच आर्थिक संबंधों में तेजी आई है, तब से चीनी भाषा के प्रति भारतीय की ललक बढ़ी है। वह कहते हैं, "अंग्रेजी हमारी भाषा नहीं है, ऐसे में चीनी भाषा ही हमारे लिए संपर्क भाषा है। चीन में अंग्रेजी बोलने और समझने वालों की तादाद कम है।"

उनका मानना है कि चीनी भाषा का कोई भी भारतीय शिक्षक इस भाषा के साथ भरपूर न्याय नहीं कर सकता, क्योंकि वर्तनी में चूक की गुंजाइश बनी रहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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