अधिकारों के मसले पर गिलानी के पक्ष में हैं नवाज शरीफ (लीड-1)

शरीफ ने घोषणा की है कि वे राष्ट्रपति को सर्व शक्तिमान बनाने वाले एक विवादास्पद संविधान संशोधन को रद्द करवा कर प्रधानमंत्री कार्यालय की ताकत बढ़ाने के गिलानी के प्रयासों का समर्थन करेंगे।

शरीफ ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया, "यदि राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से रुकावटें पैदा करने की कोशिश की गईं, तो पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) प्रधानमंत्री को समर्थन देगी।"

यहां दो अलग-अलग मुद्दे हैं- पंजाब सूबे में पीएमएल-एन की सरकार है जिसमें जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) गठबंधन में शामिल है और 17वां संविधान संशोधन रद्द होने से राष्ट्रपति के अन्य अधिकारों के साथ-साथ सूबे की सरकारों को बर्खास्त करने का अधिकार भी छिन जाता है।

जरदारी ने हालांकि यह कहा है कि पंजाब सरकार को अस्थिर नहीं किया जाएगा, लेकिन गत मई को सूबे के गवर्नर के रूप में सलमान तासीर की नियुक्ति को इसी दिशा में किए गए प्रयास के रूप में देखा गया।

गिलानी अपनी ओर से 17वें संशोधन को रद्द कराने की कोशिशों को समर्थन दे रहे हैं हालांकि पीपीपी ने इस मसले पर सार्वजनिक तौर पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

गिलानी ने एक ओर अपने एक प्रमुख सहयोगी को मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के नेता अल्ताफ हुसैन से मुलाकात करने के लिए लंदन भेजा है। हुसैन ने 17वां संशोधन रद्द करवाने संबंधी विधेयक का मसौदा संसदीय सचिवालय को भेज रखा है। गिलानी के इस कदम को उनके समर्थन के रूप में देखा गया।

दूसरी ओर मंगलवार को गिलानी ने घोषणा की कि सिर्फ संसद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच अधिकारों के संतुलन के बारे में फैसला ले सकती है। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा,"संविधान के 17वें संशोधन को रद्द कराने के लिए राजनीतिक दलों की ओर से पेश किए गए संवैधानिक सुधारों का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।'

उधर शरीफ ने भी घोषणा की कि पीएमएल-एन भी 17वें संविधान संधोधन को रद्द करवाने के लिए विधेयक का मसौदा लाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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